to you Scholar Zypsy
शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं
इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen
साकी कि न पैमाने कि बात आज हो मयखाने कि
दर्द से रिश्ता रखता है कोना कोना फिर भी
सुनी नहीं दास्ताँ कभी उसके बहक जाने कि .. Aameen
छूटेगा बंद जब हो जार जार किसी पल
घुटन सी साँसों कि कुछ तो हवा हवा होगी Aameen
इक साया साथ हो रहा हर पल
तन्हाइयों को संवार रहा हर पल
मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए
शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं
इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen
साकी कि न पैमाने कि बात आज हो मयखाने कि
दर्द से रिश्ता रखता है कोना कोना फिर भी
सुनी नहीं दास्ताँ कभी उसके बहक जाने कि .. Aameen
छूटेगा बंद जब हो जार जार किसी पल
घुटन सी साँसों कि कुछ तो हवा हवा होगी Aameen
इक साया साथ हो रहा हर पल
तन्हाइयों को संवार रहा हर पल
मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए
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