शनिवार, 18 जनवरी 2014

..........to you Scholar Zypsy

to you Scholar Zypsy 

शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं 
इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen

साकी कि न पैमाने कि बात आज हो मयखाने कि 
दर्द से रिश्ता रखता है कोना कोना फिर भी 
सुनी नहीं दास्ताँ कभी उसके बहक जाने कि .. Aameen


छूटेगा बंद जब हो जार जार किसी पल 
घुटन सी साँसों कि कुछ तो हवा हवा होगी Aameen


इक साया साथ हो रहा हर पल 
तन्हाइयों को संवार रहा हर पल

मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए

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