रविवार, 3 अगस्त 2014

मित्रता

मित्रता


मेरी आँखों में देखा कर जब में बात करता हु
मित्र हु तेरा मेरे मित्र तेरी हर अदा से प्यार करता हु

तू जुल्मी है मैं जुल्मो में बसर रात करता हु
तू जालिम मुझ पर कर सितम मैं तुझ से जज्बात रखता हु

तेरी फितरत सब समझता हु फिर भी
तू तेरा सा ही रह मैं तेरी खुदी से बड़ा लगाव रखता हु

नादाँ है तू या मैं ... ओये... क्या फरक पड़ता है
चल कल जो किया फिर वापस आज करते है

तू दे चाय के पैसे तो फिर चाय पीने चलते है
मेरे पास तो कल की पिक्चर के फटे दो टिकिट रखे है

तेरे दोस्त बहोत है तू और भीड़ लगा ले लेकिन
मेरा तो दोस्त पक्का है पक्का ही रहेगा ये समझ ले लेकिन

कल चक्खि थी बाजार से लेकर जो चीज
कड़वी थी साली पर क्या चीज़ थी है न

टीचर ने कल जब मारा था तेरे गाल पर थप्पड़
आंसू मेरे गरम बाह निकले थे पता नहीं क्यों

ये ले मेरे नोट्स तू पढ़ ले मुझे दे कुछ चिल्लर
शुक्रवार है पहला शो है चलता है चल मजे करे चलकर

चुइंगम खा कर चिपकाए थी कल जिसकी सीट पर तूने
आज वो लड़की मुझे ले गई प्रिंसिपल के पास पिटने

कौन मरता है यहीं किसी के लिए
हम जान देंगे दोस्तों की दोस्ती के लिए ... आमीन 

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