सोमवार, 18 अगस्त 2014

यादें तो यादें है....



मेरे प्रिये तुम मुझे पागल बनाते रहो ... और ये मान कर खुश रहो की मैं बन गई तुम्हारे पागल बनाने से ...क्यूंकि इस अहसास का अहसास भी मजेदार है ................................जब लोग बहोत समझदार हो जाते है तो मुझे वो और उनको मैं ...पागल नज़र आने लगते है ... किसी किसी के तो बस सींग ही नहीं उगे ... वर्ण लोग दूर से भांप लेते की कोई स्पेशल पागल आ रहा है ... क्यों बिना बात के नकाब पहन कर घुमते हो .. इंसान बने रहो काफी है ...


........ ये संवाद .. आत्मा का आत्मा से, देह का क्या भरोसा ... रोज सुबह नई हो जाती है ... जी फूल का खिलना ... खुशबु ... देना और फिर मुरझा जाना , देह की गंध ... देह की गंध ही तो है ... देह आत्मा का मंदिर ... लेकिन मंदिर में धुप बत्ती ... दिया ... किया ... तो मंदिर नहीं तो मसान... आत्मा सुवासित है ... आत्मा की आत्मा से मैत्री हो ... मित्रता तो थी ... ही मैत्री होतो देह और सुवासित होगी .. महकेगी ,, दमकेगी ... क्योंकि आत्मा खुश होगी ... मुझे देह की गंध पसंद है लेकिन ...तब तक जब तक आत्मा सुवासित हो महक न उठे .. 

विज्ञान ने ये समझने में मदद की ... है ... है न ... गुड नाईट


यादें तो यादें है जिंदा है हम यादों में ... अर्थियां उठ गई कुछ अनकहे ... ना समझे ... ख्वाबो की ... ढोते है लाश मुर्दा बेचैनियों की ... यादें तो ... जवान हो रही है ...


.... अंधेरो में डूबे ... गहरे समंदर के सीने पर .. कदम दर कदम ... मैं एक मकड़ी की तरह चलती चली जा रही थी ... आदतन एक जाला भी बुना था ... कभी वापस उस जले में लौट आती जब जब ज्वार आता समंदर की छाती फटने को होती ... लहरे किनारों को भिगो जाती ... बूँद बूँद मेंह बरसता ... और मैं फिर उठ कड़ी होती ... ये सोच कर की कभी तो उस पार पहुँच जाउंगी ... हर बार जाले का मोह .. मस्ती खींच लाती ... याद रहते है कुछ मंजर भूलते ही नहीं ... या यु कहूँ ... फेविकोल का जोड़ है ... जीवन .. और... जीवन से जुडी यादें .. भूलती ही नहीं ... फिल्मीक रील ... रियल रील के बीच फंसी जिंदगी और इसकी जद्दो जहद ... इधर मकड़ी उलटी लटकी नहीं की ...जाला बगावत कर देता है ... टूट जायेगा .. बिखर जायेगा .. तार तार दिखेगा .. मकड़ी ... वो चलती जायेगी ... इस आस के सहारे की ... वो किनारा पकड़ लू ... इस जाले के साथ साथ ... ताकि फिर लौट लौट आने का ... झंझट न हो ... मकड़ी ने ठान लिया ... समंदर के जीवो को कुछ न कहेगी , जानती है ... केंकड़े , मगर , मीन सभी उस की तरह किसी न किसी जाले में फस्से है

तुमको क्या हुआ ..... मस्त रहो ... भागो .. मृग मारीचिका में अंधे हो कर ... जब पहुंचोगे ... तो पता चलेगा ...हकीकत में प्रेम ... मकड़ी का था ... दूर रेगिस्तान में ... पानी का दिखना ...तो ... मृगमारीचिका ... और .. तुम्हारी प्यास भी तो ... मृगतृष्णा है ...

क्रमश : ...

रविवार, 3 अगस्त 2014

मित्रता

मित्रता


मेरी आँखों में देखा कर जब में बात करता हु
मित्र हु तेरा मेरे मित्र तेरी हर अदा से प्यार करता हु

तू जुल्मी है मैं जुल्मो में बसर रात करता हु
तू जालिम मुझ पर कर सितम मैं तुझ से जज्बात रखता हु

तेरी फितरत सब समझता हु फिर भी
तू तेरा सा ही रह मैं तेरी खुदी से बड़ा लगाव रखता हु

नादाँ है तू या मैं ... ओये... क्या फरक पड़ता है
चल कल जो किया फिर वापस आज करते है

तू दे चाय के पैसे तो फिर चाय पीने चलते है
मेरे पास तो कल की पिक्चर के फटे दो टिकिट रखे है

तेरे दोस्त बहोत है तू और भीड़ लगा ले लेकिन
मेरा तो दोस्त पक्का है पक्का ही रहेगा ये समझ ले लेकिन

कल चक्खि थी बाजार से लेकर जो चीज
कड़वी थी साली पर क्या चीज़ थी है न

टीचर ने कल जब मारा था तेरे गाल पर थप्पड़
आंसू मेरे गरम बाह निकले थे पता नहीं क्यों

ये ले मेरे नोट्स तू पढ़ ले मुझे दे कुछ चिल्लर
शुक्रवार है पहला शो है चलता है चल मजे करे चलकर

चुइंगम खा कर चिपकाए थी कल जिसकी सीट पर तूने
आज वो लड़की मुझे ले गई प्रिंसिपल के पास पिटने

कौन मरता है यहीं किसी के लिए
हम जान देंगे दोस्तों की दोस्ती के लिए ... आमीन 

रविवार, 20 जुलाई 2014

यादें याद आती है ... बातें बातें भूल जाती है ....


.

.....है न कोई ओर न छोर ........

जब बैठती हु लिखने ... स्टडी टेबल के करीब हाथो में कलम और कलाम यादों में, कोरे कागज सा मन ...बेचैन हो लिखता है वक्त के पन्नो पर कुछ यादें , कुछ सपने और कुछ
ख्वाब आधे अधूरे से , फिर कुछ पल .... लगता है जैसे भागना चाहती हूँ हकीकतो के दल दल से दर कर, कहीं किसी किताब के शब्दों सी बैठ जोउ पन्नो में सिमट कर और
कर लू खुद को जिल्द-ओ-जबान .....

...... इस में अनबुझ पहेली... ये जीवन, ये जीवन, हाँ ... ये जीवन जिस में जी चुकी कई सौ जीवन, हर पल मरना और हर पल का जीना एक दिव्या शक्ति अति शक्तिवान साहसी एक यात्रा है ये लिखना तेरा या के मेरा उन् संसारो में जिन का है ना कोई ओर न छोर ....और फिर यादें है यादो का क्या ... बातें ... हाँ बातें याद आती है ...
.। ... आमीन
 — 

शनिवार, 31 मई 2014

आओ बात करें"


आओ बात करें फूलों
की और नाज़ की
गुलों और उनके
गुलाबी अंदाज़ की
पंखो और परवाजो की
जज्बात और जज्बों की
चटक चटक दौड़ते लहू की
धड़कन धड़कन हरकत की
नजरो के नजरानो की
दिलों से लगी दिल्लगी की
नसीहतो से किनारों की
बेपरवाह इबादत की
मुहब्बत के बुत की
बेफिक्री की
आओ बात करें तुम्हारी
नादानियों की
आओ बात करें
मेरी तन्हाइयों की
सुनो गर दोस्त हो
तो फिर
न हँसना सुन कर
फ़साना मेरा
कह दिया अश्क-बार
हो जो हाल--गम
हम जानते है
िलो की दुनिया में
भी झूट का जो
कारोबार होता है
इधर इजहार--दर्द -ए दिल
होता है, उधर वाह वाह
होता है ......



बुधवार, 19 मार्च 2014

दरख्तो पे बेले लिपटी है कुछ ऐसे गुलबंद तेरे शानो पे सजे हो मेरी बाहो के जैसे .... aameen

पाबंदी पर पाबंदी लगाये जाते हो 
ये तो बता दो कब्र पर मेरी क्या ताले लगाओगे

दरख्तो पे बेले लिपटी है कुछ ऐसे 
गुलबंद तेरे शानो पे सजे हो मेरी बाहो के जैसे .... aameen

मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त

तेरे ऐतबार पे ऐतबार तो है 
फिर भी सम्हाल के रख दिल 
ये मेरा फिर भी दिल ही तो है ... आमीन

पीते है फिर उनको तलाशते है 
जिनके गमो के पी पी के भूलाते है

रूह से रूह कि होती रहती है बातें दिन रात 
कर ऐतबार, मरते रूहो को कभी सुना ही नहीं

मन के प्यासे हंसा को 
दे अपने अंगना कि छाँव या रब

बहोत बोलती है मेरी आँखें 
अपनी पलकों से कहो जरा
झुक के सलाम करें.

ले लो ये ज़िंदगानी हमसे अब 
दे दो कब्र कि मीठी नींद या रब


ज़िंदगी को ज़िंदगी का इंतिज़ार 
मुझको तेरे आने का ऐतबार

नज़रो से नज़ारो तक नज़र कि गिरफ्त में 
इक तू है तू है तू है तेरे सिवा कुछ भी नहीं

उनकी यादो के मंजर कुछ 
यु भी है वो सजदो में झुके हो जैसे .. 

जल रही होलियाँ

जल रही होलियाँ 
नेकी के इफाजतदारो कि 

वक्त वो आया
इज़ज़त ही नहीं इज़ज़तदारो कि 

फूलो ने कांटो से कि दोस्ती 
भंवरे है बैचैन रंग बदलते रंगो के हकदारों कि 

लिए हाथ में खंजर वो 
जाता है करने पूजा पत्थर के भगवानो कि

सूली पे लटका हर एक वो
जिसने न कि चाकरी नाके के ठेकेदारो कि

कल तलक तू मेरे संग था

कल तलक तू मेरे संग था 
हर तरफ रंग ही रंग रंग था 

राहो में फूलो का कालीन था 
ख्वाबो में आसमानी उफान था 

वो भी क्या पल थे जब सुरूर ही सुरूर था 
हम बहके भी मगर एक दुसरे का साथ था 

तेरा चश्म-ये-नूर भी गज़ब नूर था 
हर एक तेरे दीदार का कायल था

तू मेरे करीब रहा ये मेरा नसीब था
अलविदा भी न कह पाया ये मेरा नसीब था

तूने दी थी ज़िंदगी मुझे तू वो नूर था
इक ये दौर है इक वो दौर था

कल तलक तू मेरे संग था

कल तलक तू मेरे संग था 
हर तरफ रंग ही रंग रंग था 

राहो में फूलो का कालीन था 
ख्वाबो में आसमानी उफान था 

वो भी क्या पल थे जब सुरूर ही सुरूर था 
हम बहके भी मगर एक दुसरे का साथ था 

तेरा चश्म-ये-नूर भी गज़ब नूर था 
हर एक तेरे दीदार का कायल था

तू मेरे करीब रहा ये मेरा नसीब था
अलविदा भी न कह पाया ये मेरा नसीब था

तूने दी थी ज़िंदगी मुझे तू वो नूर था
इक ये दौर है इक वो दौर था

@ ANITA'S BLOG : I am an unwanted girl-child

@ ANITA'S BLOG : I am an unwanted girl-child: Oh! "Mum Why You Murdered Me ...." Have A Glance my dear You may see me crying In the cradles of an orphanage As my birth is a co...

I am an unwanted girl-child

Oh! "Mum Why You Murdered Me ...."

Have A Glance my dear
You may see me crying
In the cradles of an orphanage
As my birth is a courage
I am an unwanted girl-child

Several attempts of prayers
When mother was told 
I am a girl-child
She groans didn't smile
afraid to give birth as
I am endangered spices
b'coz
I am an unwanted girl-child

He then ordered cut her,
murder her before
She knows sunshine
b'coz
I am an unwanted girl-child

Yea I am that Girl-Child
oh mother you see me
struggling to come to live
It was god's will that
I entered into the space
the cursed corner of female species
you won't see me
I will be cut down
b'coz
I am an unwanted girl-child

I cannot smell fresh
odours of Lilly and Jasmine
Oh! the day has arrived
To cut and throw me out
b'coz
I am an unwanted girl-child

The Devil in the nursing home
infused Anaesthesia in your vein
The machinery a train
ready to bring me out
b'coz
I am an unwanted girl-child

Scissors, Knives, Medicines
Oh, Save me Mother
I cries, Oh Save Me
I cries, Oh Save me
I cries.......
Oh Mother What if
I am your unwanted girl-child

Everyone says life is easy
but truly living it is not.
I'm killed to bring the
biggest smile on his lips
even though I want to cry.
Why did you murdered me Mum
just b'coz
I am an unwanted girl-child

I was going to fight to live
even though I'm destined to die.
and even though it's hard and
I may struggle through it all.
you see me struggle..
.you will NEVER see me fall.
but Oh Mum you murdered me
b'coz
I am an unwanted girl-child

जमाना लगा कहने नूर-ए-नज़र, नूर-ए-नज़र


तेरे आने से बस ख्वाबो कि ताबीर हो रही है
ज़िंदगी अब ज़िंदगी से ख़ुशी ख़ुशी फ़ना हो रही है

कुछ यूँ भी वो शब्  गुजारा करते है
खवाबो में हसरतो से खेला करते है

चुनती थी शबनम गुलो से सुर्खी खुद पिघल पिघल
तभी तो चमन खुश्बुओ से सरोबार या रब .......

तलाश-ए-ज़िंदगी में हम भटका किये इस कदर हर बार
बियाबानों से गुजरते गए कांटो ने लहू-लुहान कर दिया

दर्द का अहसास अपना सा लगता है
मुहब्बत में तेरा न आना भी अच्छा लगता है

इश्क मुहब्बत कि बातें उनको फिजूल  लगती है
आप सरे राह क़त्ल-ए-आम कर गए वो कुछ नहीं

उनकी  नजरिए-इनायत क्या हुई  ,
यहाँ तो मौत का सामां  हो  गया

उनके इश्क में तराशे गए क्या खूब
जमाना लगा कहने नूर-ए-नज़र, नूर-ए-नज़र

तारीफ़ वो करते है अंदाज-ए-ब्यान  बदल बदल
फिर भी कहते है जालिम है आपकी अदावत या रब

हम उनको अपना बना बैठे या रब
आतिश-ए-ज़िंदगानी पे ज़िंदगी लगा बैठे

मैय्यत पे मेरी कफ़न न रखना दोस्तों
मैंने ताज उनकी मुहब्बतो का पहना है

एक सफ़र तनहा कटा : इक सफ़र  में तन्हाई न मिली
ज़िंदगी को तनहा काटा जिसने : जनाजे को उसके तन्हाई न मिली


मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

लो हमने तुम्हे अपना बना लिया जनम जनम

लो हमने तुम्हे अपना बना लिया जनम जनम
अपने कविता में सजा लिया कर के  बा-कलम

करे गर जमाना तुझे याद मेरे बहाने से,  इलज़ाम
मुस्कुरा कर दे देना बेवफाई का मेरे सर या रब

चलो कर ले लेते है  किनारे अपनी अपनी
खुदी से, कभी यूँ भी मिला करो हमसे ....

मेरे कातिल क़त्ल तुमने ये कैसे किया
जान भी न निकली और ज़िंदा भी न रहने दिया


ना कर नाकाम सी कोशिशे मुझे समझने कि
यंकी करो ज़िंदगी कि किताब के कुछ
पन्ने तो जार जार हो चुके  या रब ...

मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त

लगने लगी अब हवा कुछ गुलाबी गुलाबी या रब  
ये तो बता  तेरी  यादो का रंग हवाओ में घुला कैसे

तेरे नूर-ए-अब्र-ओ-ताब से रंग आता है कि नहीं
फाल्गुन के रंग अब तक हमने तो कभी देखे नहीं

लो आते आते आ ही गया
मेरे दुश्मन को मुझ पर प्यार या रब
कल तक खंजर हाथ में लिए फिरता था
अब ले आया गुलाब या रब


जाने क्यों तेरा अक्स मेरी तन्हाइयों में उतर रहा है
याद कर तेरा मेरा कोई हिसाब तो बाकी नहीं रहा है

रविवार, 16 फ़रवरी 2014

ख़ाक हुई अब आहें धूं धूं जली तमन्नाएं

ख़ाक हुई अब आहें
धूं धूं जली तमन्नाएं

वो कब तक ढोयेगा
बोझ एक ज़िंदा लाश का

कैसे सुन लेता है वो टप टप
२ आंसुओ कि आवाज़ दूर रह कर भी

सुना ना सैयाद ने शोर मासूम इन
साँसों का इतने करीब हो कर भी

आती है ज़िंदगी कुछ पल मुद्दतो बाद
 जब खुशबु तेरी हवाएं लाती है

मुर्दा चीखे, जिन्दा साँसे
कब्र से देंगी सदायें तुझे
बाँध कर सोने कि जंजीर से
रखा तूने मेरी लाश को जो  

कातिल है तो फिर वार कर
क़यामत का न इंतिज़ार कर
क्या पता कल क्या हो ....

मंजूर नहीं अब मुझको ये सौदे बाजी
न तू नफे कि उम्मीद कर न
मैं अब नुक्सान कि फसल करू

खेल बहोत भा गया उनको कुछ ऐसा वो
तोड़ते रहते है दिल खिलौना समझ बार बार न जाने कैसा

करेंगे वो इंतिज़ार तेरे अल्फाजो का
ज़िंदगी को जिनकी इंतिज़ार परवाज़ो का


और एक गुनाह हुआ
और एक जिन्दा लड़की का जन्म हुआ

आ बैठ पास मेरे कर कतल मेरे अरमानो का
देखे किसके होसले पहले दम तोड़ते है

ले कुछ लहू मेरे अरमानो का
सजा सेहरा तेरे अरमानो का

बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

ज़िंदगी



तनहा नहीं
इक तन्हाई
कि अनकथ
कहानी है
रेत पर चले
पतंगे के पैरो
के निशाँ है
दिए कि आस
के काले घेरे
है, गहरे नीले
समन्दरों कि चादर
पर चलना, छपाक
से उछल कूद जाना
मेंढकी कि मौत
के लिए चमकता
पानी है, चंचल
शोख, रंगीन, सोनमछरिया
और नील गाय का
भोलापन सी, खटते
खटते खट ही गयी
मुहब्बत के नाम जो
मौत के गले लगे
ज़िंदगी उनके जीने का
नाम है ज़िंदगी 

" Happy - Blessed Spring Morning



Wondrous Blue of Spring Sky
A dream of sweet odours 

Seeing a floating hollow cloud
Soft-swift cool breeze touching plains

Dappled butterflies sailing so fast
O' blessed vision improve me

Wild Rose hedge all so sweet
Morning of sweet weather

Live is still young and Love is True
both born-divine together.

 A Very Happy - Blessed Good Morning to you All 

शनिवार, 25 जनवरी 2014

आजादी कि खुली सड़क ....

मिले थे हम भी उस से कल
याद उसे हो न हो वो पल 

आजादी कि खुली सड़क पर 
तंग हाल घूम रही थी ज़िंदगी 

इक घुमंतू कि गाडी के पहिये
सी, सर्द - जर्द रातों में ओस सी

जकड़न भरे सीने में जहाँ हर पल
बूढ़े और बचपन में मौत रही थी ढल

आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी

शौक कहाँ था उसको भी वो
एक नौ-जवान जो कल तक था

माँ कि आस, पिता का आसरा
उस जवान लाश के ताबूत पर

ओढ़े लाल-चुनर टूटी कांच-चूड़ी सी
और बेहाल पड़ी एक जवान लाश सी

आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

<3 To you Scholar Zypsy  <3

तेरी मासूम सी इक मुस्कराहट ने बेबसी दी है
बे-सबब इस ज़िंदगी को क्या खूब ख़ुशी दी है

दौर-ये-ज़िंदगी भटकी बहोत मंजर-ए-खौफ में
बेमकसद इस रूह को सुकून-ए-ज़िंदगी दी है

रख दिए  जो हिम्मत से समंदर के सीने पे
मैंने कदम अनजाने उन कदमो तले जमीं दी है

बहोत नमी है आँखों कि पलकों तले सोचती हु
सदियों बाद ही सही तुमने कुछ हंसी तो दी है

सिर्फ यही इक बात नहीं कि उजाले नहीं मेरे हिस्से में
हथेली पर रखे दिए ने उम्मीदो कि रौशनी दी है

आज जिन्दा हु तो लिखती हूँ बहोत मैं
मुर्दा हाथो में जान तुम्ही ने तो दी है  .......... Aameen

कब्र कि दीवारो से ... चीत्कार एक आएगी



कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
रूह किसी प्यासे कि 
जब-जब हुक जगाएगी 
दूर कहीं नारंगी क्षितिज 
पर जब जब दिनभर का 
भुला लौट लौट आएगा 
घमंड धरा के समंदरों का 
धरा का धरा ही रह जायेगा 
आग उसके सीने कि तृप्त 
न कभी हो सकेगी ... 
सुन लेना तुम भी वो 
जब जब चीर कर सीना 
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
हरी नरम घास के सीने पर
जब ओस कि बुँदे इठलाएंगी
ओढ़ चुनरिया गुलाबी जब 
सुबहा कि लाली आएगी 
काली सियाह रात बैठेगी 
संग किसी भटकी रूह के कंधो पर 
और चुपके से जाकर चंदा के 
आँगन में चेहरा छुपा बैठ जायेगी 
सुन लेना उस वक़्त ..... 
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
लौटता हुआ हल खेतो से 
गोधूलि खूब उड़ाएगा 
प्रणय संध्या प्यारी का 
अपने साजन से हो जायेगा
पंछी सारे गाते होंगे तब 
जाते जाते वो सफ़ेद सिल्क 
के कफ़न में लिपटी धुप भी 
एक बार फिर आंसू बहाएगी 
उस के मिलने और न मिलने 
कि खाई को अब वो कभी न 
पाट पायेगी ... उस वक़्त
मेरे प्रिये तुम भी सुन लेना ...
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 

सोमवार, 20 जनवरी 2014

बहोत बोलते है मेरे अल्फाज

बहोत बोलते है मेरे अल्फाज खुद बा खुद
देख होश में रहना तेरे दिल कि बस्ती
खामोश सी लगती है अभी तलक तो मुझे

जुल्मो को मेरे तूने सहा है बहोत
फिर भी कतल तू मुझे कर गया

सोने का समझा मैंने जिसको
शीशे में मेरे अक्स सा
वो पत्थर दिल उतर गया

मरने का शौक था
तुझ पर मर मिटे
न कैसे कह देते
सदियों कि तन्हाइयों को
शिखास्त देने का मामला था

जब हम मुखातिब थे तो बात और थी
दिल ने तेरा मुखबिर बना दिया बात और है

रोशन जहाँ होता है सितारो से
चाँद हर दिन तो आँगन उतरता नहीं

गिनते रहना इंतिजार के पालो को
शौक हुआ है मेरा
तेरा साथ मिले ये नसीबो कि बात है
तेरे मेरे बस कि नहीं  

माना अब्र-ओ-ताब हो जल मरना
मेरी भी आदत में शुमार सा तो है


बढ़ती ही जाती है बेखुदी मेरे या रब
कुछ तो जतन कर क्या इतनी भी
कद्र नहीं मेरे जज्बात कि


जीवन है, गीत है, हर पल

मैं जानती हूँ तुम कौन हो
हाँ, और मैं ये भी जानती हु कि 
मैं कौन हूँ,
फिर ये भी कि सच्चाई 
क्या है, 
डरो नहीं सच्चाई ... ?
सच्चाई तो सिर्फ प्रेम है 
वो जो तुम में 
वो जो मुझ में 
सांस ले रहा है
जीवन है, गीत है, हर पल का
मौन साक्षात है
वो एक निराकार विचार
वो एक निशब्द संवाद
सुनो उस एक धड़कन
कि कई कई धड़कनो को
सीने से लगा कर
उसके अस्तित्व को
स्पर्श के अलौकिक अहसास को
पी लो उस मय-मधुर रस को
बहक सको गर कुछ क्षण
बहको जीवन सुवास को
जानोगे तभी मेरे साथी
साथ के सुंदर अहसास को ....

शनिवार, 18 जनवरी 2014

@ ANITA'S BLOG : .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भीरिश्ता ...

@ ANITA'S BLOG : .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भी
रिश्ता ...
: .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भी रिश्ता मुक्म्मल तोड़ देते है, याद करते है जिनको हम यकीं मानो ... उनके एक इशारे भर पर सांस लेना...

@ ANITA'S BLOG : Oh dear death come to me .... I want to die.

@ ANITA'S BLOG : Oh dear death come to me .... I want to die.: Oh Death Hear me  once, till i rejoice come to me, air me  so to fly, bliss me  by thy soft touch  Take me with you  I want to fly so high ...

@ ANITA'S BLOG : ..........to you Scholar Zypsy

@ ANITA'S BLOG : ..........to you Scholar Zypsy: to you Scholar Zypsy  शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं  इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen साकी कि न पैमाने कि बात ...

..........to you Scholar Zypsy

to you Scholar Zypsy 

शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं 
इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen

साकी कि न पैमाने कि बात आज हो मयखाने कि 
दर्द से रिश्ता रखता है कोना कोना फिर भी 
सुनी नहीं दास्ताँ कभी उसके बहक जाने कि .. Aameen


छूटेगा बंद जब हो जार जार किसी पल 
घुटन सी साँसों कि कुछ तो हवा हवा होगी Aameen


इक साया साथ हो रहा हर पल 
तन्हाइयों को संवार रहा हर पल

मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए

Oh dear death come to me .... I want to die.



Oh Death Hear me 
once, till i rejoice
come to me, air me 
so to fly, bliss me 
by thy soft touch 
Take me with you 
I want to fly so high
that no one even
my own wish could
touch me not ...
take me there where
no one could dare to
reach thy sublimity
in me of innocence
deep in my sigh,
Take me to there
engrave me with all
my sorrows, pains
and fatal fate destine
sweep me away in
yon wonder deep
blue waters of so deep
vanish thy name that
tagged me to weep
Let my soul be free
free from all alkaline
this Form of mine
is nothing to do except dine
Prevail thee that resting in me
let it free and set aside
let it go to meet that abide
where no sea, no shore, no sigh
Oh My Dear Death
come hug me tight
take me to there
to fly on so heights
let my soul be pure and polite
let me learn be humble
to shine so bright
kill thy anguish and arrogance
kill thy revenge and intolerance
teach me to live dumb, deaf, dull
Oh death come to me
I want to die.

{ read and enjoy my fancied creativity ---

though the tone is pessimistic but friends are requested not to impose it on my very persona... }