शनिवार, 25 जून 2022

 All are gathered,

all were assembled

Everyone is tremblling,

everyone is crawling

Reasons  rembling

reasons  flatter

All are Sufferers

all are travellers

Destiny is playing

Destiny's Dancing

Dancing upon destiny

oh Almighty 💐

 

Dr-Anita Rathi

सोमवार, 13 जून 2022

इन्द्रधनुषी आलिंगन

 बादलों से घिरी सुबहो की मल्लिका ने 

बिखेर दी इन्द्रधनुषी खुशबुयें, आलिंगन 

किया जब पुरवाई सी हवाओं ने ......


भीगी भीगी सी डालियों ने किया नव कलरव 

गीत गया कोयल ने खुशियों में नव पल्लव 

नव श्रींगार हो रहा धरा का हो मस्त मगन मगन 

नाच उठा आज गगन भी घूम घूम आँगन आँगन 


बूँद बूँद जी उठी .... सुन्दर सपन सलोनी सी 

मौसम ने जो ली अंगड़ाई खिल गया दिल चमन चमन।

मंगलवार, 7 जून 2022

तपती रेत के राही

 जब जिंदगी किसी तूफान में फंसी हो तो सहज सरल चलते चलो हवाओ का रुख बदलेगा तो स्वयं को और गति से आगे बढ़ते पाओगे वैसे ही जैसे  उफनती लहरों पर जैसे ये नैया का अस्तिव है

अब कहां मायने रखता हैं वो तेरा इंतिजार, आना ना आना ...  शांम ढलने लगी हैं ... एकांत सुहाना लगता हैं .. 

तपती रेत के समंदर पर ... खुले आसमान को मेहसूस करना ... ज़िन्दगी कि ट्रेंन कि रफतार को खुली खिडकियों से देखना ... जीवट सुख होता हैं ...

मसान जगह2 दिखे ... मगर ध्यान क्षितिज से जा चिपका उगता सूरज .. ढ़लती शांम  से देखा ...

गहरा लिखने के लिए गहरा जीना पड़ता है पानी मे रहकर खुद को रिसते बहते खत्म होते देखना होता है आसान नही कागज पर जज्बात उकेर देना, ना जाने कब स्याही बनकर घुल जाना होता है  स्याही एक दिन रीतेगी और लिखा हुआ किसी कागज की कतरन पर इक नजर को आराम पहुंचा रहा होगा तब तक घुल जाना ही अनवरत रहे तो जीवन सार्थक एक कलम का ...  

पत्ते शाखो से बिछड़कर कब जी पाते है ये जड़ो को मालूम होता है मगर वो जमीन में सीना धँसाये सब मौन स्वीकृत करती है क्योंकि नवसृजन ही उनका कर्म निर्धारित है

चलने तो लगे हम इंन राहो पर 

बहोत खूबसूरत सी जान कर 

रुको थोड़ा समझो ये कहीं 

तबाही के घर का रास्ता तो नहीं

न बात करो अब चाँद तारो की कहानीया  सुनने से अब नींद नहीं आती, बिखरा पड़ा है मेरे ही घर में मेरा वज़ूद , तुम आओ तो आँगन बुहार लू  । उगता सूरज डूबता चाँद, तेरी याद के साथ ही आते जाते रहते है। आधी रात का मंजर मुझे बहोत अच्छा लगे है । चाँद भी तेरी तरह आवारा लगे है भटकता ही रहता है। तुम्हारी आहट ज्यूँ मोगरे की महक, घर भर लेती हु अब सिर्फ इन खुश्बुओ से। 

यादें तो यादें है यादों का क्या ... 💐💐💐




राहीराज

शुक्रवार, 3 जून 2022

कश्मीरी हवाएं

 पानियों की किश्ती पानियों से लिखी चिट्ठियां, पानियों में बहते हुए शब्दों से जज्बात, पानियों पे चलती मिलती बिछड़ती  परछाइयां हम तुम, 


जानती हूँ  मैं  बहोत गहरी नही व्व झील तेरे शहर की या रब

मगर हर्ज क्या है एक किनारे का दूसरे किनारे से मिलने की तलब में या रब 


उन हवाओ पर तैरते, तेरे शहर का एक बादल चुरा लिया मैंने आखिर कुछ तो बात थी कि बहोत दूर तक चली मैं मगर फिर तुझ तक न पहुंची मैं ,


 तूने तो कहा था दिल से दिल को राह होती है 

जानती हूं मैं ये महज वहम की बाते होती है या रब । 


Dr-Anita Rathi