मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

<3 काश लिखू कुछ ऐसा ..
नव वर्ष आपका मंगलमय बने ... <3

नए साल कि नन्ही ओंस
बन, नयी कलम और नयी यादें
काश लिखू कुछ ऐसा कि
फिर और जियादा आया करू
ख्वाबो में आपके लेकर नए वादे

खामोश आपकी जुबान
के शब्द में बनू
टूटे गर ख्वाब कोई
आपके तो नए ख्वाब बनू
काश के लिखू कुछ ऐसा
भटके प्रेमी कि राह बने

खामोश जुबां के शब्द बनूं
टूटे सपनो के टुकड़े चुनूं
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
भटके अपनो की राह बुनूं
परेशान हो गर आप तो
सुकून कुछ पहुँचाउ
काश लिखू कुछ ऐसा
जाने से पहले कुछ काम आऊं

दुखी हिरदय कि मरहम बने
शब्द मेरे निर्धन कि हिम्मत बने
काश लिखूं कुछ ऐसा  कि
मेरी यादें आपकी यादे बने

नव वर्ष के नव गीत बने
शब्द करे रोशन हर दिल
काश लिखू कुछ ऐसा
शब्द एक एक दीप बने

जंग लगे रिश्तो कि बात बने
जोड़ सकू दिलो को कविता ऐसी बने
काश ! लिखूँ कुछ ऐसा कि
दिलो के बैर मिटे और बात बने

कविता के छंदो से नव-पुष्प बने
खुशबु से इनकी सारा आलम महके
आस कि सरिता बहे नव-गीत-गजल बने
प्रेम के झरने रिसे भाव कि गंगा बने

काश लिखू कुछ ऐसा !
नव वर्ष आपका मंगलमय बने

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

I confess… forever and ever

I confess… forever and ever

Yess! I confess shameless 

Holding your hand in public 

Smiling at you for my own reason


Grab you beholding white collar


And cheeks, pink and crimson


Pulling you to snuggle close to close


To make you feel as well to me so safe


I want to tell you, you are my love

Now at this particular piece of time

Not by clock but by sublime,

Loving you every second so that

One day you might believe it

And lay your head on my chest listening

to the beats train-bye-passing,

as drifting off to sleep

Want to put a kiss on your scars

For make you feel, that

I love you forever and ever
That’s only way to live forever and ever.

थोडा और ठहर मेरी जां चली जाना,

थोडा और ठहर मेरी जां चली जाना,
किसी से यु मुह मोड़ कर जाना अच्छा नहीं होता

क्योंकि, गुफ़तगू तो उनसे रोज होती है मगर
मुद्दतो हो जाती है सामना नहीं होता

सुरूर सा रहता है हल्का हल्का हर वक्त मगर
उसके इश्क में खो दू होश नशा उतना भी नहीं होता

घर में रहना बाहर न आना तुम में आग है
आज शहर भर में ठंडक है जियादा मगर
हर किसी से हंस के मिलना अच्छा नहीं होता

है ये सफ़र बहोत प्यारा जो निकल सको मेरे साथ मगर
ध्यान इतना रहे तुम तुम रहना क्योंकि
तेरे साथ भी रहु और मैं भी रहे ऐसा मुझ से नहीं होता

हर मुसाफिर कि किस्मत में मंज़िल नहीं होती मगर
हमसफ़र दिलबर सा मिल जाये ये भी कुछ कम नहीं होता


तुमने देखा बड़ी इनायतों से आँखों आँखों में बात तो हुई मगर
ना मेरा दिल चखो समझ पता गर तेरा इस इशार भर न होता

मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

आँधियों से नहीं हम डरते ...


आँधियों से नहीं हम डरते
हम तूफ़ानो में पले है
बैसाखिओं पर नहीं हम चलते
हम अपने दम पर चलते है
रुई के फाहे सी हो चाहे
बनावट मेरी हस्ती कि
मिट जाऊ भले धुआ धुआ
नाजुक हु कमजोर नहीं
कठोर सर्द रातों का मौसम
जितना गहरा होगा
बसंत और इंद्रधनुषी रंग
लिए उतना निखर होगा
बारूद से डर जाऊ ऐसी नहीं मैं
चिराग-ए-दिल जलाती हु मैं
जल-बुझु कर दूर तिमिर गहरा
या के जला के ख़ाक कर दू
शहर सारा, ऐसी हो सकती नहीं मैं

जाम हो या जान हो , तुम्हारी गिरफ्त में हो तो बात हो ...

मेरी आँखों में आंसू थे
तेरी खातिर, जमाने 
तूने दिए दर्द इस कदर
 ज़माने कि खातिर 


कहने से अगर ऐतबार हो जाये
छू भर लेने से गर प्यार हो जाये 
तेरे कूचे से हमेशा को हम चले जाये........... 
कातिल मेरे जो  इक बार तेरा दीदार हो जाये 


भीड़ भर के साये सुभा से शाम मिलते है 
कितने बिस्मिल है जिनसे दिल मिलते है 



तोड़ो दिल मेरा इत्मीनान से 
हक़ दिया हमने आपको ऐतबार से 
बस हक़ अता अब तुम करना 
आवाज़ न हो दिल यू तोडा करना

बेसबब मुहबत का अंजाम हम भी देखेंगे
तेरी बाहों में जाती है जान
 खुली आँखों से हम भी देखेंगे


एक वक़्त ही नहीं साथ मेरे और क्या
वरना, रखा है क्या इश्क-ए-ज़िंदगी में  


जाम हो या जान हो ,
तुम्हारी गिरफ्त में हो तो बात हो


ला पिला दे साकिया , जाम ऐसा अनूठा 
छोड़ा जिसको मुहब्बत के प्यासे ने झूठा  ... 


मयकदे के जाम में मय घटी जाय है 
साकी दे दे पता मयकश को 
अब मुहब्बत के मसीहा का 


साथी साथ होते है 
रस्ते आसान होते है
मिलते नहीं हीरे पेड़ो पर 
कोयले कि खान में रखे होते है  



रविवार, 22 दिसंबर 2013

@ ANITA'S BLOG : ' प्यार ' एक गजल ...

@ ANITA'S BLOG : ' प्यार ' एक गजल ...: ' प्यार ' मेरी एक गजल  ... तुमको तुम्हारी दरियादिली कि कसम या रब अपने हाथो कि लकीरो में बसा ले मुझको मैं जो काबिल नहीं तेरे श...

' प्यार ' एक गजल ...

' प्यार ' मेरी एक गजल  ...


तुमको तुम्हारी दरियादिली कि कसम या रब
अपने हाथो कि लकीरो में बसा ले मुझको

मैं जो काबिल नहीं तेरे शान-ये-गुलिस्तां या रब
तो यूँ कर अपने कदमो कि धुल पे बिछा ले मुझको

रोशन हो सके कुछ दूर ज़िंदगी तेरी या रब
यूँ कर फिर दीया वो माटी का मान जला ले मुझको

दुनिया कि आँधियों से बचा लू तुझको या रब
यूँ कर दर्द के सेहरा का पता अब दे दे मुझको

तेरी हस्ती पर आंच न आये कभी या रब
मेरी हस्ती मिटने का कोई आज सबब दे मुझको

मैं चली जाउंगी ना आउंगी याद तुझको या रब
करू खुद को सुपूर्द-ये-खाख उस समंदर का पता दे मुझको

कल कि बात और है मैं सांस और ले सकू न ले सकू या रब
जितना जी चाहे तू आज सता ले मुझको  

मेरे प्यार कि किस्मत में गर तेरी बे-बफाई ही है या रब
तो बे-बफाई सिखा करना इस दुनिया से मुझको  


मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले

मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा  लगाने वाले

बेचना सीखा नहीं अपने ज़मीर को हमने
मुझको दौलत का नशा दिखने वाले

कर खुद कि हस्ती पर एक अहसान
जुबान से आग बरसाने वाले

ज़िंदगी का कुछ वक़्त मुझ सा गुजार ले और
फिर मिले कभी तो बताना मुझ पर सवाल उछलने वाले

होश रहे गर तो सुन लेना किसी से मेरी ज़िंदगी के नगमें
तेरे साथ भी गर बीते मुझ सी मेरी हसी उडाने वाले

मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा  लगाने वाले 

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

'मुक्ति'

अक्सर ख्यालो में
एक ख्वाब देखती है वो
और सोचती है एक ख्वाब ही
के बारे में अक्सर काश
ऐसा हो,  कफ़न में सोने से
पहले सामने वो रूप रुपहला
हो जीते जी तो जी भर ना देख
पाये जिसको है आखिरी एक
तमन्ना मुक्त आकाश कि ऊंचाई
से देखे उसको मेरी रूह,
हो कर आजाद इस माटी
इस धरा के बंधनो से मुक्त
होकर देखे हर पल काश ऐसा हो
हो ऐसी ख़ुशी जो ख़ुशी से जियादा हो
... होगी मेरी रूह तब अपनी ही
दुनिया में  और  सुकून  से  हर
पल  देखा  करेगी  वो  तुझे
हो  कर  आज़ाद  जीवन  - मृत्यु
के  बंधनो  से   दुनिया  के
बे -मकसद  इरादो  से करेगी
दीदार  तेरा होकर  बेखोफ
सैयाद  कि  सजाओ  से
 देता  है  जो  नित  नयी सजाएं
उसके अस्तित्व  को, करता
लहू लुहान पंखो को कैद के पिंजरे से
और पिंजरे कि कैद से, तब  होगी
आज़ाद  मेरी  रूह  सैयाद  कि
कैद से, होगा इक अक्स  सजल
ठहरी सी इन आँखों में ,
हां वो  तब  भी  रहेगा यु ही
बेखबर किन्तु में  हूंगी
चिर-स्थिर मुस्कान लिए,
 खुशियां अपार लिए, ना
सुध होगी चाँद सितारों कि
 ना डर दिन के ढल जाने का
न होगा इंतिज़ार उसको
फिर उसके आने का,
न होगा डर उस्के
बिछड़ जाने का
खुश होगी वो देख दूर
आसमान में, क्षितिजों के पार
हा रूह मेरी तुमसे बिछड़ कर,
ताका करेगी तुम्हे सिर्फ तुम्हे,
 ठहरे हुए सपने होंगे,
सिमित सिर्फ तुम तक होंगे,
हर पल निर्जीव से मेरे लबो पर
नाम सिर्फ तुम्हारा होगा,
उस वक्त ताकने को सिर्फ
 एक नजारा होगा,
होंगे नज़ारे जहां भर के,
हमारी भटकती रूह को
एक सहारा तेरा होगा .

गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

याद रहेगा

आये थे मौसम कभी यु भी बहार के याद रहेगा 
हम भी थे कभी खुशगवार तेरे आने से याद रहेगा 

होता है कैसा साथ फूलो का साथ तेरा यु याद रहेगा 
बहार होती है चमन में कब तेरा मुस्कुराना याद रहेगा 

होती है जन्नतो कि हवा कैसी तुमसे मिलना याद रहेगा 
रुखसार तेरा यु गेसू हटाना हटा कर मुस्कुराना याद रहेगा 

बेमकसद भटकती रूह को जो मिला ज़िंदगी का सिला याद रहेगा 
कूचे में मुहब्बत के छोटा सा एक अपना आशियाँ बनाना याद रहेगा 

दीपक कि रौशनी को कुछ  दे दो आराम ये कहना याद रहेगा 
कह कर अपनी निगाह मेरे दर पर लगाना याद रहेगा 

हो कर बा-खबर मेरे हालात से तेरा अंदाज़-ये-बयां याद रहेगा  
बा-मकसद नहीं साथ तेरा मेरा तेरा ये अंदाज भी हमें याद रहेगा 

पीकर नाम पियाला मीरां सा खो जाना याद रहेगा 
तेरे आने से खुद अपना पता भूल जाना याद रहेगा 

समझाइश पर भी तेरी यु मेरा नादान हो जाना याद रहेगा 
समझा समझा कर इस दिल को, दिल का हार जाना याद रहेगा 

अश्को के धागो को कात कात यादो के जाल बनाना याद रहेगा 
उलझनो को मेरी यु उँगलियों से तेरा सुलझाना याद रहेगा 

आना एक सपना बन कर रहना यु अपना बना कर याद रहेगा 
पूनम के चाँद तेरे रोशन घेरे में एक छोटा सितारा बन रहना याद रहेगा 

अब है ज़िंदगी का एक ही सिला ये तेरा वज़ूद हमें याद रहेगा 
खो कर धुंध सी ज़िंदगी को तेरे साये के अंधेरो में गुम हो जाना याद रहेगा 

Action Speaks More Than Words ....

 Action Speaks More Than Words ....  

Snow scattered onto my Locks
Oh! re-freshening too ...

Charm that entangled to my face
Oh! It's Charming too ...

Soft as dew of dawn to my sense
Oh! Soothing too ....

Wilder were the Expressions
Oh! Crazy me willing too ...

Wounds yet green wave surpass
Oh! It's Brooding, Brooding and Brooding too ...

Scholar's jest and toil no noise
Oh! Envied Souls Scorning too..

Love your substance showers
Oh! Keep on Pouring, Pouring and Pouring too ...

Day by day faster is grows
Oh! Sink me sinking in too ...

now Said Bye-Bye Good Bye tears
Oh! it's happiness delightening too...

Wow Scholar-zypsy love your Tiger-Eyes
Oh! keep me in your sigh I praying too ...

Dark is night where my soul made a wish
Oh! keep on Touring, Touring and Touring too ..

हिमालय सा उसका वजूद मुझको झुका गया वो

दर्द के रिश्ते को खुशगवार कर गया वो 
आया यु कि खुश्बुओ से तर कर गया वो 

खुद अपनी ही खबर नहीं यु बेखबर कर गया वो 
देकर साँसों का पता अपना पता दे गया वो 

है गाफिल एक पंछी इस कदर जानता था वो 
गंगाजल थोडा पिला ज़िंदा कर गया वो 

एक झक-सफ़ेद कबूतर खबरनवीस था वो 
देकर पता मुझको मेरा यु फ़किरी सिखा गया वो

बैचैन बहारो को खुश्बुओ से सरोबार कर गया वो
महके जो फूल हरसिंगार के तरोताज कर गया वो

कोहरे कि चादर से ढकी ज़िंदगी को बेपर्दा कर गया वो
ओंस कि बूंदो कि मानिंद नमी मुझ में भर गया वो

हिमालय सा उसका वजूद मुझको झुका गया वो
पिघली बर्फ से निकली भागीरथी सी मुझको बहा गया वो

सख्त मौसम में झोखा खुशनवार है वो
सर्दी कि जर्द खौफ में धुप गुन-गुनी है वो

संस्कृति

क्या ढूंढते हो 
पत्थर के सनम 
पत्थर के खुदा 
पत्थर के सब 
इंसान देखे 
ढूंढा बहोत 
गली गली 
उस मसीहा को 
लेकिन सारे पत्थर 
में ढल मंदिर में 
कैद मिले
सोचा था बहोत
आओगे तुम न आये
द्रौपदी का चीर तो
खुद पांडव उधेड़ते मिले
काल के हाथो
से बचा न पाये
संस्कृति को यु
चौराहो पे लूटते देख के
पत्थर के लोग
रहे खामोश,
पन्ने पलट ते
रहे अखबारो के
चीखे बहोत सुनी
गली के पहरे दारो ने
देख गंदे पैरो को
मोर सी रोई बहोत
मोरनी मखमली
बिस्तर के किनारो से
फटी ऐड़ियों कि दर्दीली
दरारो से टपकते लहू के
कतरो से रिस्ते दर्द से
घायल सी एक बेवा
पाल रही न जाने
किस किस के
बाल -गोपालो को
सेरोगेट मदर है
अपनी कोख बेच बेच
दे रही उम्र अपने
कांधा देने वालो को

(कहीं दूर चिल्ला रहा था एक रेडिओ ... " औरत ने जनम दिया मर्दो को ..... मर्दो ने उसे बाजार दिया "

The sea is calm now

The sea is calm now
Half drowsed intoxicateth
freed thy soul unchainth 
my spirit , leaving it softened aside.....
oh scholar zypsy have u tasted
it alike me, answer me
where is the ocean 
afloating thee pious-drop
my throat quenched thirst 
me on flight flying on top
Oh shepherd bless him
To his toil to delight me
give me strength to save
faith in me n be pure as lilly
let my heart behold his pains
n my mind to work upon thy desire.
Sweet is the taste seed you sowed
reaped by me the fruits of thy crop
yea .... sweet is the taste.

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2013

बरसो के ख्वाब पुराने याद आये तेरे जाने से तेरे आने के बहाने सारे याद आये

रहेगा प्यार तेरा ज़िंदगी बन कर 
साथ मेरे तेरा इक साया सा है।
कैसे कहु कि दिल को 
दिल से लगा लिया 
जो पड़ा मिला धूल में 
तो सीने से लगा लिया 
ज़िंदगी का हिस्सा अब 
किताब के पन्नो में 
किस्से तेरी पलकों से 
बिसर बिसर मेरी कविता में 
न छंद न अलंकार है
तेरी खुश्बुओ का अहसास है
तू पास थी, तू पास है ... तू पास है
इस कविता को जब कोई
दोहराएगा मेरे साथ तुझे
हमेशा पयेगा। दर्द का
दर्द से रिश्ता था पुराना
ये जानेगा अब ज़माना
तु न आना अब लौट लौट
फिर दुःख देगा वरना
बनाकर इक और फ़साना
कुछ पल आराम कर वहाँ
नहीं होगी साँसे किसी कि
बपौतियाँ जहां।
तू रह सुकून से अब वहाँ
तरसते है जाने को फ़रिश्ते जहाँ
उस बगिया में तू फूल बन
महक परियों कि सहेली बन
न भूल न याद कर किस्से
रहने दे ये काम मेरे हिस्से
जब तक नहीं मिलेंगे
ये वक्त यु ही काट लेंगे
तेरे हिस्से कि वो बातें
मेरे किस्से में ढाल देंगे
शब्द ही मिले थे हम
शब्द ही में रह लेंगे
तू कर आराम बादलो
के बिछोने पर,
शब्दो के मोतियों कि
माला में पिरो लुंगी।
वकत कटेगा तो काट लूंगी
न कटेगा तो कविता लिख लुंगी
न फ़िक्र कर तेरा साथ मैं
नहीं छोड़ूंगी। तेरी फ़ितरतों
को क्या नाम दू आज
जी में आता है तेरी राहो पे
अपनी साँसे वार दू

(dedicated to loving soul dear Neelam Saxena ....now resting in peace  ...  after ... 7/12/2013) will always reside in my verse ... 


सोमवार, 9 दिसंबर 2013

यादें याद आती है ... बातें बातें भूल जाती है ..........

 

ऐसा नहीं कि उसकी आँखों में नमी न थी, अश्रु ग्रंथियां काम करती थी बल्कि पनीली सी आँखों में जो देखता खो सा जाता ... गजब एक आकर्षण था उसकी आँखों में, जवानडिस से थोडा पीलापन था मगर फिर भी वो आँखें ..
. कुछ खोजती सी .. भटकती सी ... एक जगह ठहर जाए आदत नहीं थी ... कंचे कि गोली सी हर वक़्त लुढकती रहती ... कोई पत्ता भी हिलता तो पलकों के झरोखो से एक ही सांस में सब कुछ कोना कोना स्कैन कर लिया जाता और मजे कि बात बात करते तो पता चलता इमीटेट भी कर लिया ... किस रंग का ड्रेस पहना है , कोनसी बुक पढ़ रहा है, किसकी आँखे किसको देख रही है किताब कि बजाये ... व्हाइट शर्ट वाले रिन कि सफेदी ... वाले भाईसाहब का हरे दुपट्टे वाली के साथ नोट्स बनाने का क्या राज है ... सुन वो इंजन साहब आज दिख नहीं रहे ... इंजन साहब कौन यार क्लियर बता .... मेरे बस कि नहीं तेरी ये भाषा ...नहीं न सुन तो .... अरे वही ... इंजन साहब ... ब्लैक ब्यूटी ... जो हरवक़त रेड & वाइट कि एक न एक सिगरेट सुलगाये लगातार धुँआ उगलते रहते है .. तेरी आँखें है कि टिकती नहीं ... तुम टॉप कैसे कर ली ... हलकी सी कातिल मुस्कान से जवाब सिर्फ मुस्कान ... सुन कई दिनों से लवर'स पॉइंट पर नहीं गए चल चलते है ... नहीं ओय चुप कर ... तेरी ये कंचे सी आँखें कभी इधर कभी उधर ... एक न एक अटक जाता है फिर उस से पीछा छुड़ाओ। तो क्या हुआ ... चल पोस्ट ऑफिस चल ... रोज एक लैटर आता उसका , उसके पेन - फ्रेंड का ... बैंगलोर से ... खुश होती और फिर वही .. वो लैटर पढ़ कर उसकी पनीली आँखों में एक अजीब सी ख़ुशी दिखती ... चल यार कल भी ... बॉयज ने बहोत परेशां किया , ... वैसे भी चार बज गए ... लेट हो जायेंगे ... ये तो शुक्र कर तेरे मजनू के दोस्त ने बचा लिया ... वर्ना ... वर्ना क्या ... उठा के ले जाते तुझे ... और ये कंचे घुमा घुमा के देखो ... अरे नहीं वो देखने लायक भी है… कोन ... वो ही mr. टूटे फूटे ... देख तू ये आदत छोड़ दे ... ये .. इन् नमूनो के नामकरण कि .... अब बता न कौन टूटा फूटा ... वो देख ... वो गेट से एंटर किये ... उफ्फ्फ अब अब क्या करें ...इस लवर'स पॉइंट पर बैठने का यही नतीजा है ... और बैठ .... चल कोई नहीं . ... देख लेंगे आने दे ... .... एई ... सुनो इधर आओ .. गाडी में बैठे कुछ गुण्डे टाइप में से एक टूटे फूटे ... ने पुकारा ... तुम तब भी बाज नहीं आई .... कंचे सी आँखे घुमा उनको देख कर फिर दूसरी तरफ घुमा ली ... सुना नहीं तुमने ए ई ..हे तुम ... रहा हु सुना नहीं .... इधर आओ .... जान निकली नहीं तो बाकी बची नहीं उसकी ... सुन कुछ कर ... अब में क्या करू ... इन् आँखों कि ...... आपकी पनीली आँखों का कमाल है .... जाइये बुला रहे हा जाना तो पड़ेगा , सुन कार से दूर रह कर सुन ले क्या कहते है , फिर में हु न तेरे साथ दर मत जा , वरना .... मुसीबत कि जब खुद कार से उतर कर आ गई तो ... मैंने दो चार रसीद करदेने है ... बवाल हो जायेगा ..... जाओ तुम सुन लो क्या कहते हा हमारे आदरणीय सीनियरस ...... डरी सहमी सी गई .. जी , सुन तू .. मन्ने चोखी लागे स .... ता कह रयो हूँ तू ये तेरी गोटियां इतनी न घुमाया कर , ... और हाँ ये तेरी फ्रेंड को कह ... दादा गिरी न किया करे .... और हाँ तुम दोनों अच्छी लडकियां हो मैं तुम्हारा रेस्पेक्ट करूँ हु .... चल जा और अब घर जा या जगह सिंसरे लडकियां के बैठने कि नि .... ठीक ... ओह गॉड .... गाडी चली गई ... हम भी ... तौबा करे ... कि जान बची ........ लेकिन हाँ ... वो सीनियर अब बहोत अच्छे लगते है .... गुंडागर्दी के भी कुछ एथिक्स हुआ करते थे ...... और आज आज तो ... अब क्या कहे ... बस बातें है .. वर्त्तमान ... अतीत के बीच के कुछ यादों के हिचकौले है .... फिर भी बातें तो बातें है .... बातो का क्या ... बस यादें याद आती है ...

गुरुवार, 7 नवंबर 2013

@ ANITA'S BLOG : KAHO DIL SE.. ASHOK GEHLOT FIR SE

@ ANITA'S BLOG : KAHO DIL SE.. ASHOK GEHLOT FIR SE: राजस्थान - लोक कल्याणकरी राज्य बनाम अशोक गेहलोत सरकार    राजस्थान कि अवाम के जेहन में कोई नाम उभर कर आता है तो वो है - श्री अशोक गेहलोत...

बुधवार, 6 नवंबर 2013

Oh I Just Heard "The Voice ..."




Oh I Just Heard "The Voice ..."

Voice as Chanting, 
close as pulse
highly rating
Air too is supporting
Shimmer Gleaming
Sheer - Cold Dear
Voice Come Behold
Allow me to Sit, oh Sir
Lit not any Fire
Love n Desire
Let's awake heavens
Heavens and Altar
Sing a song
Bold and Strong
Delight the Form
You Temple me and
I to you roam n survive.
Pray and pride
worship to catch the tide
Lost to lavish
n Delight.

मंगलवार, 29 अक्टूबर 2013

RAJASTHAN  मुख्यमंत्री राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए : न कि किसी और और रज्य का !

श्री अशोक गहलोत जी का जन्म मंडोर, जोधपुर राजस्थान में हुआ हैं !

*(जब्की वसुंधरा राजे मध्य प्रदेश से हैं न कि राजस्थान से ! वसुंधरा को राजस्थान में मध्य प्रदेश से लाकर थोपा गया हैं भाजपा द्वारा !)

 जब राजस्थान कि धरती के सपूत लायक है तो ... किसी और प्रदेश से ... मुख्यमंत्री एक्सपोर्ट क्यों किया जाये। वो भी एक बार मौका दे दिया गया हमारे बुजुर्गो द्वारा .... आखिर अंतिम घडी में वो भी पछताए अपने निर्णय पर .......

 हमें अपने बुजुर्गो के अनुभवो से शिक्षा लेनी चाहिए ..... अन्यथा पछतावे के अलावा कुछ नहीं रहेगा .....

   " अब फैसला आपका क्योंकि भविष्य है आपका "


रविवार, 8 सितंबर 2013

यादें .... याद आती है ... बातें .... बातें भूल जाती है ..


मुश्किल बहोत है इन्तिज़ार की खाई को पाटना, न ये कहना की रुको मत जाओ , न ये सह पाना की तुम्हारा जाना .. ना मालूम अजीब सा इन्तिज़ार दे जाता है, क्यों कोई किसी को इतना याद आ आ कर परेशां कर जाता है की .... की .... ..... कुछ कहा जा सकता , मुश्किल है बहोत मुश्किल है ये समझ पाना की किसी को किसी की कितनी याद आती है या आ रही है ... जब लगे उस की तरफ वाले रास्ते पर चलना शुरू कर दिया जाये , शायद इन्तिज़ार की घड़ियाँ काटने का सबसे अच्छा तरीका है फिर लगता है ... क्यों किस बात की बैचैनी है ... टिकी है घडी की सुइयां अपनी धुरी पर .... चल रहा है समय ... समय या काम , काम और समय , इन दो शब्दों ने बाँध लिया हो जैसे , जिंदगी की डोर को और फिर कह दिया जाओ अब तुम आजाद हो ,... जो जी आये करो ... कितने बिस्मिल है जो जी पाए अपनी खुदी से , ... बहोत से घायल है ... मयखानों से पूछो तो ... नहीं बता पायेगा मयकदा ... की कल कितने थे .. और जो घायल थे वो कितने घायल थे ... इक पल को समय से दूर ... नहीं हो सकते जबकि पता है ... घडी का आविष्कार ... सरे फसाद की जड़ है .... टाइम से बंध कर ... सारे बंधन भूल गए ... लेकिन ये बंधन समय और सीमा ... दम घोंट देता है कितने नवांकुर अरमानो का , ... जवान उम्मीदों का ... घुट के रह जाती है साँसो का उड़ता धुँआ .... तब .. सिर्फ यादें .. हाँ यादें जब याद आती है ... बातें ... बातों का क्या ... बातें भूल जाती है ..........

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

हमारा प्रदेश - हमारी संस्कृति

हमारा प्रदेश - हमारी संस्कृति

PART : 6   : जयपुर- राजस्थान 
जयगढ़ दुर्ग : जयपुर की शान


 एक गणना के अनुसार राजस्थान में 250 से अधिक दुर्ग व गढ़ हैं। खास बात यह कि सभी किले और गढ़ अपने आप में अद्भुत और विलक्षण हैं। दुर्ग निर्माण में राजस्थान की स्थापत्य कला का उत्कर्ष देखा जा सकता है।  राजस्थान में दुर्ग निर्माण की परम्परा पूर्व मध्यकाल से ही देखने को मिलती है। र्गों के निर्माण में राजस्थान ने भारतीय दुर्गकला की परंपरा का निर्वाह किया है। निर्माण कला की दृष्टि से दुर्गों को अलग-अलग वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। अर्थात अलग-अलग उद्देश्य की पूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार के दुर्गों का निर्माण होता है। इन विभिन्न प्रकार के दुर्गों का उल्लेख करते हुए कौटिल्य ने छ: प्रकार के दुर्ग बताए है। उसने कहा है कि राजा को चाहिए कि वह अपने राज्य की सीमाओं पर युद्ध की दृष्टि से दुर्गों का निर्माण करे। राज्य की रक्षा के लिए "औदिक दुर्गों" (पानी के मध्य स्थित दुर्ग अथवा चारों ओर जल युक्त नहर के मध्य स्थित दुर्ग) व पर्वत दुर्ग अथवा गिरि दुर्गों (जो किसी पहाड़ी पर स्थित हो) का निर्माण किया जाय। आपातकालीन स्थिति में शरण लेने हेतु "धन्वन दुर्गों" (रेगिस्थान में निर्मित दुर्ग) तथा वन दुर्गों (वन्य प्रदेश में स्थित) का निर्माण किया जाय। इसी प्रकार मनुस्मृति तथा मार्कण्डेय पुराण में भी दुर्गों के प्राय: इन्हीं प्रकारों की चर्चा की गई है। राजस्थान के शासकों एवं सामंतो ने इसी दुर्ग परंपरा का निर्वाह किया है। यहाँ शायद ही कोई जनपद होजहाँ कोई दुर्ग या गढ़ न हो। इन दुर्गों का अपना इतिहास है। सुदृढ़ प्राचीरअभेद्य बुर्जेंकिले के चारों तरफ़ गहरी खाई या परिखागुप्त प्रवेश द्वार तथा सुरंग,किले के भीतर सिलह रवाना (शस्त्रागार)जलाशय अथवा पानी के टांकेराजप्रासाद तथा सैनिकों के आवास गृह-यहाँ के प्रायः सभी किलों में विद्यमान है। 

'जयपुर' दुनिया के सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक शहरों में शुमार किए जाने वाला यह शहर तीन ओर से पहाड़ियों से घिर है। उत्तर में नाहरगढ की पहाड़ियां और पूर्व से लेकर दक्षिण में आमागढ़ की पहाड़ियों का विस्तार है। जयपुर में पहाड़ की शिखा पर बना सबसे खूबसूरत किला नाहरगढ़ दुर्ग है। यह पूरे जयपुर शहर से दिखाई देता है। नाहरगढ से ही उत्तर में इसी पहाड़ के दूसरे छोर पर जयगढ़ किला स्थित है। 

जयगढ़ किले को विजय किले के रूप में जाना जाता है। यह जयपुर के विख्‍यात पर्यटन स्‍थलों में से एक है जो अरावली की पहाड़ियों पर चीलटिब्बा ( ईगल्‍स के हिलपर अम्‍बेर किले  से 400 फुट की ऊंचाई पर स्थित है।इस किले से जयपुर के चारों ओर नजर रखी जा सकती थी इस किले के दो प्रवेश द्वार है जिन्‍हे दूंगर दरवाजा और अवानी दरवाजा कहा जाता है जो क्रमश: दक्षिण और पूर्व दिशाओं पर बने हुए है।यह दुर्ग आमेर शहर की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ---- में महाराजा जयसिंह जी द्वितीय ने बनवाया था। बाद में उन्हीं के नाम पर इस किले का नामजयगढ़ पड़ा। मराठों पर विजय के कारण भी यह किला जय के प्रतीक के रूप में बनाया गया। यहां लक्ष्मीविलासललितमंदिरविलास मंदिर और आराम मंदिर आदि सभी राजपरिवार के लोगों के लिए अवकाश का समय बिताने के बेहतरीन स्थल थे। यह किला जयपुर शहर से १५ किमी . की दूरी पर स्थित है  यह आमेर रोड पर स्थित है आमेर रोड पर जल महल के सामने से होते हुए आमेर घटी में एक मार्ग नाहरगढ़ की पहाड़ियों की  जाता है यहीं से एक रास्ता नाहरगढ़ के लिए निकलता है तो दूसरा रास्ता जयगढ़ दुर्ग के लिए। पहाड़ियों के निचले पायदानों में विश्वप्रसिद्ध आमेर महल भी स्थित है।

ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि अकबर के दरबार में सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने मुगल शहंशाह के आदेश पर अफगानिस्तान पर हमला किया था. इस इलाके को जीतने के बाद राजा मानसिंह को काफी धन-दौलत मिली, लेकिन उन्होंने इसे दिल्ली दरबार में सौंपने के बजाय अपने पास ही रख लिया. इस घटना के बाद से ये चर्चाएं चलती रहीं कि राजघराने ने यह संपत्ति गुप्त स्थानों पर छिपाकर रखी है. जयगढ़ किले के निर्माण के बाद कहा जाने लगा कि इसमें पानी के संरक्षण के लिए बनी विशालकाय टंकियों में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात छिपा कर रखे गए हैं.  मानव की विकास यात्रा में कला का प्रवेश मनुष्य के मन में तब हुआजब उसकी प्राथमिक आवश्यकताएँ पूरी हो गईं।

 कला विहीन मनुष्य मशीन है। कला के संग संवेदनाएँ जुड़ी हुई हैं। कला मनुष्य में स्पन्दन का बीजारोपण करती है। कला मन को झंकृत करती है। सभ्यता के विकास के साथ संस्कृति समृद्ध होती चली गई। संस्कृति की अभिव्यक्ति मनुष्य ने विभिन्न रूपों में की।  मध्ययुगीन भारत की प्रमुख सैनिक इमारतों में से एक जयगढ़ दुर्ग की खास बात यह कि इसमें तोपें ढालने का विशाल कारखाना थाजो शायद ही किसी अन्य भारतीय दुर्ग में रहा है। 

‘जयबाण’ तोप को एशिया की सबसे बड़ी तोप :
इस किले में रखी ‘जयबाण’ तोप को एशिया की सबसे बड़ी तोप माना जाता है।  लगभग पचास टन भारी और सवा छह मीटर लम्बाई की इस विशेष तोप को यहीं दुर्ग परिसर में ही निर्मित किया गया था। तोप 50 किमी तक की दूरी पर निशाना साध सकती थी।जयगढ़ अपने विशाल पानी के टांकों के लिये भी जाना जाता है। जल संग्रहण की खास तकनीक के अन्तर्गत जयगढ़ किले के चारों ओर पहाड़ियों पर बनी पक्की नालियों से बरसात का पानी इन टांकों में एकत्र होता रहा है।  इस किले का निर्माण एवं विस्तार में विभिन्न कछवाहा शासकों का योगदान रहा हैपरन्तु इसे वर्तमान स्वरूप सवाई जयसिंह ने प्रदान किया।  वर्तमान में जयगढ़ किले में मध्यकालीन शस्त्रास्त्रों का विशाल संग्रहालय है। यहाँ के महल दर्शनीय हैं। जयगढ़ को रहस्यमय दुर्ग भी कहा जाता है,क्योंकि इसमें कई गुप्त सुरंगे हैं। इसमें सबसे खास था आमेर महल से जयगढ़ जाने वाली सुरंग | इस सुरंग का भी ऐतिहासिक महत्व है। यह सुरंग एक गोपनीय रास्ता थी जिसका इस्तेमाल राजपरिवार के लोग एवं विश्वस्त कर्मचारी जयगढ़ तक पहुंचने में किया करते थे। 

ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक आमेर रियासत को सबसे ज्यादा खतरा मराठों से था। इसीलिए आमेर की सुरक्षा के लिए तीन तीन दुर्गों का निर्माण किया गया। राजपरिवार को संभावित खतरे से बचाने के लिए जयगढ़ तक यह सुरंग बनाई गई। इस किले में राजनीतिक बन्दी रखे जाते थे। ऐसा माना जाता है कि मानसिंह ने यहाँ सुरक्षा के निमित्त यहाँ अपना खजाना छिपाया था। वर्तमान में जयगढ़ किले में मध्यकालीन शस्त्रास्त्रों का विशाल संग्रहालय है। यहाँ के महल दर्शनीय हैं। हाल ही यूनेस्को की एक टीम ने आमेर महल का दौरा किया। आमेर महल को विश्व विरासत सूची में शामिल करने से पूर्व नियमों की कसौटी पर इसे परखा गया। इस विजिट से पूर्व आमेर महल के इतिहासिक पक्षों का नवीनीकरण किया गया।

 आमेर महल से जयगढ़ जाने वाली सुरंग :
 इसमें सबसे खास था आमेर महल से जयगढ़ जाने वाली सुरंग का तलाश कर फिर से गमन करने योग्य बनाना।  जयगढ़ किले में खजाने की बात देश को आजादी मिलने के बाद भी गाहे-बगाहे चर्चा में आती रही |विश्वस्त सूत्रों से पता चलता है की इस वक्त जयपुर राजघराने के प्रतिनिधि राजा सवाई मान सिंह (द्वितीय) और उनकी पत्नी गायत्री देवी थे. 'स्वतंत्र पार्टी' के सदस्य ये दोनों लोग कांग्रेस के धुर विरोधी थे. गायत्री देवी तीन बार जयपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर लोकसभा सदस्य भी बनीं. इस दौरान राजघराने के कांग्रेस पार्टी से संबंध काफी खराब हो गए| 1975 में जब देश में आपातकाल लगा तब गायत्री देवी ने इसका मुखर विरोध किया और कहा जाता है कि इंदिरा गांधी सरकार ने इस वजह से आयकर विभाग को राजघराने की संपत्ति की जांच के आदेश दे दिए. 1976 में सरकार की इस कार्रवाई में सेना की एक टुकड़ी भी शामिल थी. इसे जयगढ़ किले में खजाना खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई. उस समय सेना ने तीन महीने तक जयगढ़ किले और उसके आस-पास खोजी अभियान चलाया. लेकिन खोजी अभियान समाप्त होने के बाद सरकार ने औपचारिक रूप से बताया कि किले से किसी तरह की संपत्ति नहीं मिली.हालांकि बाद में सेना के भारी वाहनों को दिल्ली पहुंचाने के लिए जब दिल्ली-जयपुर राजमार्ग तीन दिन के लिए बंद किया गया तो यह चर्चा जोरों से चल पड़ी कि सेना के वाहनों में राजघराने की संपत्ति है. लेकिन बाद में इस बात की कभी पुष्टि नहीं हो पाई और अभी तक यह बात एक रहस्य ही है |

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

"मुक्तक" मन के मुक्त आकाश से ,,,



अपने पास एक खंजर धारदार रखिये
छुपे बैठे रंगे सियार नज़र पहरेदार रखिये |

करने वार तुम्हारी हस्ती पर चालाक रिश्ते
सम्हाल सम्हाल कर आगे कदम रखिये |

आस्तीन के सांप है कुछ दोस्त यहाँ 'राहीराज'
थोडा जेहर गटकने की आदत बनाये रखिये |

झूठे वादों से मतलब साधने वाले ये कमीने
नगीने परख परख पालने का हुनर रखिये |

इतनी आसान नहीं डगर पनघट की यूँ
सम्हल सम्हल कर कदम काई पर रखिये |

एक से एक है कलाकार इस जहां में
आप अपनी अदा का पूरा पूरा ख़याल रखिये|

विश्वासघात करेगा वो ये ही फितरत है उसकी 'अनु'
जागी रह, वो खड़ा है हर लम्हा करने वार, चौकस रहिये |

बहुत जालिम है दुश्मन के नाती
फिर भी पीठ पीछे बैठे घात लगाये देखिये |

कल घर से निकले ही नहीं तुम , वरना
वो तो साधे है तुम पर निशाना सम्हालिए।

कितने सूरज उग दो चहुँ और दोस्त
अंधेरो का किये वरण मेरे प्यारे बैठे है |
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ये तेरे नाम की खुमारी है

ये तेरे नाम की खुमारी है

ये तेरे करम का रहम है
ये तेरे नाम की खुमारी है
तेरी निगाह का ही काम है
सुरूर है, नशा है , बस अब
मुझको ये काम है , के तेरे
दर पे रहे निगाह और तेरी
राह में हो हर एक काम है
जानती हु तू आएगा सुन
कर मेरा ये कलाम, बस ये
ही एक काम है,
ये तेरे नाम की खुमारी है
ये तेरे करम का रहम है
तेरे दर पर मेरे सकीना ये
दिल रख दिया, ये जान रख दी
ये सर रख दिया , ये कलाम
रख दिया अब और कितना झुकाओगे
अब तो पास आकर गले लगाओ
ये तेरे नाम की खुमारी है
ये तेरे करम का रहम है

ये क्या हो गया है तुम्हे

 ये क्या हो गया है तुम्हे
राशन की कतार में
खड़े खड़े थक गए इस कदर
की सुकून के पलों में
बातें होती है
बढती महंगाई की
पानी के बिल की
बिजली के बल्ब बदलने की
लो वोल्ट उपकरणों की
हाई ब्लड प्रेशर की
लो लेवल राजनीति की
घटिया मिलावटी मसालों की
 ...... ये क्या हो गया है तुम्हे
होती है घर की बैठक में
अब हलचल कम ...
दोस्तों का आना जाना है कम
उनका पेट्रोल जलता है
हमारा गैस का सिलेंडर
उनका दिल जलता है
हमारी भावनाएं दम तोडती है
अब कहाँ वो निश्छल हंसी
अब कहाँ वो ठहाके
गलती से अनु तू जो हंस भी ली
गली वाले तुरंत पूछ लेंगे
क्या मिल गया जो इतना हस रही हो
क्या है ऐसा जो हर वक़्त मुस्कुराती हो
कैसे कहू , मैं हु न
क्या  होना काफी नहीं
तुम हो न क्या तुम्हारा होना
काफी नहीं ... ढूंढते हो तुम
किसको इस संगदिल
हवा में, खोये हो क्यों
इस बाढ़ में, क्यों लगा है सोच
इस बात का , कहीं कल का
अखबार न करदे उद्घोष
लगेगा टैक्स, आएगा बिल
ऑक्सीजन लेने का
और को CO२ डिस्पेंस का
सुनो , कालर को ठीक कर लो
थोड़ी सी छाछ पी लो
हल्का नशा ठीक रहेगा
नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।
  नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।