बुधवार, 19 मार्च 2014

दरख्तो पे बेले लिपटी है कुछ ऐसे गुलबंद तेरे शानो पे सजे हो मेरी बाहो के जैसे .... aameen

पाबंदी पर पाबंदी लगाये जाते हो 
ये तो बता दो कब्र पर मेरी क्या ताले लगाओगे

दरख्तो पे बेले लिपटी है कुछ ऐसे 
गुलबंद तेरे शानो पे सजे हो मेरी बाहो के जैसे .... aameen

मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त

तेरे ऐतबार पे ऐतबार तो है 
फिर भी सम्हाल के रख दिल 
ये मेरा फिर भी दिल ही तो है ... आमीन

पीते है फिर उनको तलाशते है 
जिनके गमो के पी पी के भूलाते है

रूह से रूह कि होती रहती है बातें दिन रात 
कर ऐतबार, मरते रूहो को कभी सुना ही नहीं

मन के प्यासे हंसा को 
दे अपने अंगना कि छाँव या रब

बहोत बोलती है मेरी आँखें 
अपनी पलकों से कहो जरा
झुक के सलाम करें.

ले लो ये ज़िंदगानी हमसे अब 
दे दो कब्र कि मीठी नींद या रब


ज़िंदगी को ज़िंदगी का इंतिज़ार 
मुझको तेरे आने का ऐतबार

नज़रो से नज़ारो तक नज़र कि गिरफ्त में 
इक तू है तू है तू है तेरे सिवा कुछ भी नहीं

उनकी यादो के मंजर कुछ 
यु भी है वो सजदो में झुके हो जैसे .. 

जल रही होलियाँ

जल रही होलियाँ 
नेकी के इफाजतदारो कि 

वक्त वो आया
इज़ज़त ही नहीं इज़ज़तदारो कि 

फूलो ने कांटो से कि दोस्ती 
भंवरे है बैचैन रंग बदलते रंगो के हकदारों कि 

लिए हाथ में खंजर वो 
जाता है करने पूजा पत्थर के भगवानो कि

सूली पे लटका हर एक वो
जिसने न कि चाकरी नाके के ठेकेदारो कि

कल तलक तू मेरे संग था

कल तलक तू मेरे संग था 
हर तरफ रंग ही रंग रंग था 

राहो में फूलो का कालीन था 
ख्वाबो में आसमानी उफान था 

वो भी क्या पल थे जब सुरूर ही सुरूर था 
हम बहके भी मगर एक दुसरे का साथ था 

तेरा चश्म-ये-नूर भी गज़ब नूर था 
हर एक तेरे दीदार का कायल था

तू मेरे करीब रहा ये मेरा नसीब था
अलविदा भी न कह पाया ये मेरा नसीब था

तूने दी थी ज़िंदगी मुझे तू वो नूर था
इक ये दौर है इक वो दौर था

कल तलक तू मेरे संग था

कल तलक तू मेरे संग था 
हर तरफ रंग ही रंग रंग था 

राहो में फूलो का कालीन था 
ख्वाबो में आसमानी उफान था 

वो भी क्या पल थे जब सुरूर ही सुरूर था 
हम बहके भी मगर एक दुसरे का साथ था 

तेरा चश्म-ये-नूर भी गज़ब नूर था 
हर एक तेरे दीदार का कायल था

तू मेरे करीब रहा ये मेरा नसीब था
अलविदा भी न कह पाया ये मेरा नसीब था

तूने दी थी ज़िंदगी मुझे तू वो नूर था
इक ये दौर है इक वो दौर था

@ ANITA'S BLOG : I am an unwanted girl-child

@ ANITA'S BLOG : I am an unwanted girl-child: Oh! "Mum Why You Murdered Me ...." Have A Glance my dear You may see me crying In the cradles of an orphanage As my birth is a co...

I am an unwanted girl-child

Oh! "Mum Why You Murdered Me ...."

Have A Glance my dear
You may see me crying
In the cradles of an orphanage
As my birth is a courage
I am an unwanted girl-child

Several attempts of prayers
When mother was told 
I am a girl-child
She groans didn't smile
afraid to give birth as
I am endangered spices
b'coz
I am an unwanted girl-child

He then ordered cut her,
murder her before
She knows sunshine
b'coz
I am an unwanted girl-child

Yea I am that Girl-Child
oh mother you see me
struggling to come to live
It was god's will that
I entered into the space
the cursed corner of female species
you won't see me
I will be cut down
b'coz
I am an unwanted girl-child

I cannot smell fresh
odours of Lilly and Jasmine
Oh! the day has arrived
To cut and throw me out
b'coz
I am an unwanted girl-child

The Devil in the nursing home
infused Anaesthesia in your vein
The machinery a train
ready to bring me out
b'coz
I am an unwanted girl-child

Scissors, Knives, Medicines
Oh, Save me Mother
I cries, Oh Save Me
I cries, Oh Save me
I cries.......
Oh Mother What if
I am your unwanted girl-child

Everyone says life is easy
but truly living it is not.
I'm killed to bring the
biggest smile on his lips
even though I want to cry.
Why did you murdered me Mum
just b'coz
I am an unwanted girl-child

I was going to fight to live
even though I'm destined to die.
and even though it's hard and
I may struggle through it all.
you see me struggle..
.you will NEVER see me fall.
but Oh Mum you murdered me
b'coz
I am an unwanted girl-child

जमाना लगा कहने नूर-ए-नज़र, नूर-ए-नज़र


तेरे आने से बस ख्वाबो कि ताबीर हो रही है
ज़िंदगी अब ज़िंदगी से ख़ुशी ख़ुशी फ़ना हो रही है

कुछ यूँ भी वो शब्  गुजारा करते है
खवाबो में हसरतो से खेला करते है

चुनती थी शबनम गुलो से सुर्खी खुद पिघल पिघल
तभी तो चमन खुश्बुओ से सरोबार या रब .......

तलाश-ए-ज़िंदगी में हम भटका किये इस कदर हर बार
बियाबानों से गुजरते गए कांटो ने लहू-लुहान कर दिया

दर्द का अहसास अपना सा लगता है
मुहब्बत में तेरा न आना भी अच्छा लगता है

इश्क मुहब्बत कि बातें उनको फिजूल  लगती है
आप सरे राह क़त्ल-ए-आम कर गए वो कुछ नहीं

उनकी  नजरिए-इनायत क्या हुई  ,
यहाँ तो मौत का सामां  हो  गया

उनके इश्क में तराशे गए क्या खूब
जमाना लगा कहने नूर-ए-नज़र, नूर-ए-नज़र

तारीफ़ वो करते है अंदाज-ए-ब्यान  बदल बदल
फिर भी कहते है जालिम है आपकी अदावत या रब

हम उनको अपना बना बैठे या रब
आतिश-ए-ज़िंदगानी पे ज़िंदगी लगा बैठे

मैय्यत पे मेरी कफ़न न रखना दोस्तों
मैंने ताज उनकी मुहब्बतो का पहना है

एक सफ़र तनहा कटा : इक सफ़र  में तन्हाई न मिली
ज़िंदगी को तनहा काटा जिसने : जनाजे को उसके तन्हाई न मिली