शनिवार, 25 जनवरी 2014

आजादी कि खुली सड़क ....

मिले थे हम भी उस से कल
याद उसे हो न हो वो पल 

आजादी कि खुली सड़क पर 
तंग हाल घूम रही थी ज़िंदगी 

इक घुमंतू कि गाडी के पहिये
सी, सर्द - जर्द रातों में ओस सी

जकड़न भरे सीने में जहाँ हर पल
बूढ़े और बचपन में मौत रही थी ढल

आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी

शौक कहाँ था उसको भी वो
एक नौ-जवान जो कल तक था

माँ कि आस, पिता का आसरा
उस जवान लाश के ताबूत पर

ओढ़े लाल-चुनर टूटी कांच-चूड़ी सी
और बेहाल पड़ी एक जवान लाश सी

आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

<3 To you Scholar Zypsy  <3

तेरी मासूम सी इक मुस्कराहट ने बेबसी दी है
बे-सबब इस ज़िंदगी को क्या खूब ख़ुशी दी है

दौर-ये-ज़िंदगी भटकी बहोत मंजर-ए-खौफ में
बेमकसद इस रूह को सुकून-ए-ज़िंदगी दी है

रख दिए  जो हिम्मत से समंदर के सीने पे
मैंने कदम अनजाने उन कदमो तले जमीं दी है

बहोत नमी है आँखों कि पलकों तले सोचती हु
सदियों बाद ही सही तुमने कुछ हंसी तो दी है

सिर्फ यही इक बात नहीं कि उजाले नहीं मेरे हिस्से में
हथेली पर रखे दिए ने उम्मीदो कि रौशनी दी है

आज जिन्दा हु तो लिखती हूँ बहोत मैं
मुर्दा हाथो में जान तुम्ही ने तो दी है  .......... Aameen

कब्र कि दीवारो से ... चीत्कार एक आएगी



कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
रूह किसी प्यासे कि 
जब-जब हुक जगाएगी 
दूर कहीं नारंगी क्षितिज 
पर जब जब दिनभर का 
भुला लौट लौट आएगा 
घमंड धरा के समंदरों का 
धरा का धरा ही रह जायेगा 
आग उसके सीने कि तृप्त 
न कभी हो सकेगी ... 
सुन लेना तुम भी वो 
जब जब चीर कर सीना 
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
हरी नरम घास के सीने पर
जब ओस कि बुँदे इठलाएंगी
ओढ़ चुनरिया गुलाबी जब 
सुबहा कि लाली आएगी 
काली सियाह रात बैठेगी 
संग किसी भटकी रूह के कंधो पर 
और चुपके से जाकर चंदा के 
आँगन में चेहरा छुपा बैठ जायेगी 
सुन लेना उस वक़्त ..... 
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 
लौटता हुआ हल खेतो से 
गोधूलि खूब उड़ाएगा 
प्रणय संध्या प्यारी का 
अपने साजन से हो जायेगा
पंछी सारे गाते होंगे तब 
जाते जाते वो सफ़ेद सिल्क 
के कफ़न में लिपटी धुप भी 
एक बार फिर आंसू बहाएगी 
उस के मिलने और न मिलने 
कि खाई को अब वो कभी न 
पाट पायेगी ... उस वक़्त
मेरे प्रिये तुम भी सुन लेना ...
कब्र कि दीवारो से
चीत्कार एक आएगी 

सोमवार, 20 जनवरी 2014

बहोत बोलते है मेरे अल्फाज

बहोत बोलते है मेरे अल्फाज खुद बा खुद
देख होश में रहना तेरे दिल कि बस्ती
खामोश सी लगती है अभी तलक तो मुझे

जुल्मो को मेरे तूने सहा है बहोत
फिर भी कतल तू मुझे कर गया

सोने का समझा मैंने जिसको
शीशे में मेरे अक्स सा
वो पत्थर दिल उतर गया

मरने का शौक था
तुझ पर मर मिटे
न कैसे कह देते
सदियों कि तन्हाइयों को
शिखास्त देने का मामला था

जब हम मुखातिब थे तो बात और थी
दिल ने तेरा मुखबिर बना दिया बात और है

रोशन जहाँ होता है सितारो से
चाँद हर दिन तो आँगन उतरता नहीं

गिनते रहना इंतिजार के पालो को
शौक हुआ है मेरा
तेरा साथ मिले ये नसीबो कि बात है
तेरे मेरे बस कि नहीं  

माना अब्र-ओ-ताब हो जल मरना
मेरी भी आदत में शुमार सा तो है


बढ़ती ही जाती है बेखुदी मेरे या रब
कुछ तो जतन कर क्या इतनी भी
कद्र नहीं मेरे जज्बात कि


जीवन है, गीत है, हर पल

मैं जानती हूँ तुम कौन हो
हाँ, और मैं ये भी जानती हु कि 
मैं कौन हूँ,
फिर ये भी कि सच्चाई 
क्या है, 
डरो नहीं सच्चाई ... ?
सच्चाई तो सिर्फ प्रेम है 
वो जो तुम में 
वो जो मुझ में 
सांस ले रहा है
जीवन है, गीत है, हर पल का
मौन साक्षात है
वो एक निराकार विचार
वो एक निशब्द संवाद
सुनो उस एक धड़कन
कि कई कई धड़कनो को
सीने से लगा कर
उसके अस्तित्व को
स्पर्श के अलौकिक अहसास को
पी लो उस मय-मधुर रस को
बहक सको गर कुछ क्षण
बहको जीवन सुवास को
जानोगे तभी मेरे साथी
साथ के सुंदर अहसास को ....

शनिवार, 18 जनवरी 2014

@ ANITA'S BLOG : .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भीरिश्ता ...

@ ANITA'S BLOG : .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भी
रिश्ता ...
: .... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भी रिश्ता मुक्म्मल तोड़ देते है, याद करते है जिनको हम यकीं मानो ... उनके एक इशारे भर पर सांस लेना...

@ ANITA'S BLOG : Oh dear death come to me .... I want to die.

@ ANITA'S BLOG : Oh dear death come to me .... I want to die.: Oh Death Hear me  once, till i rejoice come to me, air me  so to fly, bliss me  by thy soft touch  Take me with you  I want to fly so high ...

@ ANITA'S BLOG : ..........to you Scholar Zypsy

@ ANITA'S BLOG : ..........to you Scholar Zypsy: to you Scholar Zypsy  शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं  इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen साकी कि न पैमाने कि बात ...

..........to you Scholar Zypsy

to you Scholar Zypsy 

शबनम नहीं न सही ... शुगुफ्ता हो जाएं 
इक आपके शाने- इत्र से महकी हवा ही हो जाएं ... Aameen

साकी कि न पैमाने कि बात आज हो मयखाने कि 
दर्द से रिश्ता रखता है कोना कोना फिर भी 
सुनी नहीं दास्ताँ कभी उसके बहक जाने कि .. Aameen


छूटेगा बंद जब हो जार जार किसी पल 
घुटन सी साँसों कि कुछ तो हवा हवा होगी Aameen


इक साया साथ हो रहा हर पल 
तन्हाइयों को संवार रहा हर पल

मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए

Oh dear death come to me .... I want to die.



Oh Death Hear me 
once, till i rejoice
come to me, air me 
so to fly, bliss me 
by thy soft touch 
Take me with you 
I want to fly so high
that no one even
my own wish could
touch me not ...
take me there where
no one could dare to
reach thy sublimity
in me of innocence
deep in my sigh,
Take me to there
engrave me with all
my sorrows, pains
and fatal fate destine
sweep me away in
yon wonder deep
blue waters of so deep
vanish thy name that
tagged me to weep
Let my soul be free
free from all alkaline
this Form of mine
is nothing to do except dine
Prevail thee that resting in me
let it free and set aside
let it go to meet that abide
where no sea, no shore, no sigh
Oh My Dear Death
come hug me tight
take me to there
to fly on so heights
let my soul be pure and polite
let me learn be humble
to shine so bright
kill thy anguish and arrogance
kill thy revenge and intolerance
teach me to live dumb, deaf, dull
Oh death come to me
I want to die.

{ read and enjoy my fancied creativity ---

though the tone is pessimistic but friends are requested not to impose it on my very persona... }

Oh dear heart.... Guide me

Oh dear heart.... 
Guide me to thy 
pedantic discourse
Ought to become 
My maiden speech
My soul longing
to live you in me
Though remaind very less
few hours few moments 
of togetherness ... 
soul to soul interaction
Want to roam around
around the globe ...
Not material...
collecting memories
fresh dew , smoky snow
bright sun rays in my
memory bag...
Yea I wish ... I longs
to be your companion
forever forever .....
........... interrupted. ...

Wear not hott make up

Wear not hott make-up
Improve your glow
nurture your soul
with love so devine
Reflection s improve
With a curve of smiles
Sure be adorable my soul
make a baby-kiss ...
Forehead sun bright
chrimsons with violet surely griddled you ...
hugg me tight
hold your tongue
Speech sugar confined
Brighten eyes to be
loved and delight
my words are none
Except your act of delight
The sun is so bright
get out me of my plight
NATURE.. heals wounds
How much they piled . Aameen

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

.... ताल्लुक तोड़ देते है जो हमसे तो हम भी
रिश्ता मुक्म्मल तोड़ देते है, याद करते है जिनको हम
यकीं मानो ... उनके एक इशारे भर पर सांस लेना छोड़ देते है

दुनिया भर के नज़ारे है , बस
इक तेरी दीद ही रही दूर हमसे

चमन में अब के कैसा ये आलम-ए-बहारा या रब ...
न गुल खिले, न उनसे मिले , न मय ही पी या रब  

हम ग़ज़ल , हम राह , हम सफ़र एक तुम या रब
है यकीं हमें भी इतना तो ... कभी तो तुम आओगे या रब


माना के सियासत और मुहब्बत में सब कुछ जायज है
मगर ... दिल ये मेरा या के तेरा दिल है पत्थर तो नहीं

ये किसने याद किया इतनी शिद्दत से मुझको
या रब के हिचकियाँ सिसकियों में ढाल रही है

वो जो थे दर्द के गीत अब गज़ल में ढाल गए
देख तेरे आने का असर है मेरे रुखसार पे जालिम

मरने से पहले मर कर देख लेना चाहिए ...
किसी कि मुहब्बत में जी कर देख लेना चाहिए

कफ़न मुझे भी है  नसीब ... पता है मुझे
फिर भी बेवफाई तो न होगी मुझसे पता है मुझे
जिये जायेंगे इक आस है नसीब  पता है मुझे
फिर भी छोड़ दू दामन कैसे तेरा .....
तू गुजरा वक़्त तो नहीं पता है मुझे

रविवार, 5 जनवरी 2014

जिधर देखु तेरा अक्स नजर आता है
दिल कि बस्ती में इक मुहिब सन्नाटा है
धड़कन धड़कन खामोश सी धड़कती तो  है

लगन को है नशत-ए-कार कितने कितने या रब
न हो मरना मौका-बा-मौका तो जीने का मजा क्या ...

यक-सार जहां-ए-गुरुर कहा क्या होगा अंजाम
जां-निसार कहते हमें तो बात कुछ और थी

चेहरे कि लकीरो से आप कि रौनक-ए-आम-औ-ख़ास दिख जाती है
पता चलता है बहोत गुरुर है तेरी फ़ितरतों में, फितरत दिख ही जाती है

ला तेरे इश्क़ में चलूँ जलते अंगारो पर 
कसम खा कि तू जले जख्मो पर नमक नहीं डालेगा

 ज़िंदा हूँ मगर ज़िंदगी का नाम-ओ-निशाँ पता नहीं 
मुसाफिर हूँ सफ़र है मंजिल भी है साथी कोई नहीं 

आती है रोज़ रोज़ तेरी यादो सी लहरें 
न जाने बेवजह साहिल से मिलती क्यों नहीं


दरिया ओ मय में डूबे मयकदों 
के होते है जाने दीवाने कितने
साहिल पे रुकते किसी को देखा नहीं फिर भी


लो फिर आज रोशन जहाँ कर लो 
ये शम्मा यु ही जलेगी तमाम रात ...


दर्द ए मुहब्बत कि लौ जलाये रखती है 
इक शम्मा परवाने कि आस लगाये रखती है

सब्र के लूम पर ख्वाबो के सूत काट रही हु 
आओगे तुम इक दिन इक जाल खुद के लिए बुन रही हु


सुर्ख गुलो का साथ पसंद है हमें तुम कभी कभी
मेरी खिड़की से यूँ बे - मौका भी नज़र आया करो Aameen


चाँद बनके तुम झरोखे में आया करो आजायेंगे
हम भी यु ही भटकते तुम रोज़ बुलाया करो ..






शनिवार, 4 जनवरी 2014

" की-चेन "

{आधुनिकता का बिगड़ा स्वरुप खुली आँखों से देखो ... और .. फिर .. वो भी एक .. माध्यम कद कि लेखिका कि निगाहो से... कुछ ... कल्पना .. को पंख मिलते है तभी वो उड़ती है वो कलम जो तलवार कि धार सी चलती है}

एक कहानी प्रस्तुत  है आपके लिए ***

" की-चेन "

.... सुनो अपना की-चेन दो तो

क्यों ... नहीं में इन्वॉल्व नहीं हु

मैंने कहा अपना हार्ट-शेप की-चेन दो जल्दी  सब लोग पार्टी में मेरा वेट कर रहे है ... जल्दी करो ... सुनो
तुम आज बहोत खूबसूरत लग रही हो ... तुम्हे चाँद कहूं कम है .... चलो अब जल्दी ... कम ऑन डार्लिंग....

देखिये आप मुझे यहाँ से ले चलिए .... मुझे ये सब बिलकुल पसंद नहीं ... घर में सब कुछ अस्त-व्यस्त पड़ा है .. बेटू भी अकेला है ... टी.वी कब तक देखेगा ... प्लीज़ ... ड्राईवर को कहिये मुझे घर ड्रॉप कर दे ...

नो नो ... नो स्वीट हार्ट .. आज तो ऋषभ का ब' ड़े पार्टी है साड़ी रात एन्जॉय करने के बाद ही घर चलेंगे ... लाओ अब तुम अपना की-चेन दो ....

नहीं ...

तुम भी न एकदम जाहिल औरत हो ... मानसी तुमसे शादी करके तो मैंने पाप कर लिया तुम अपने बाप के घर में ही सही थी , पवित्र ... फॉर एवर ... हूँ .. डर्टी लेडी ... बास्टर्ड .. अरे लडकियां तरसती है मुझ जैसे रोमांटिक पति के लिए और एक तुम हो ... ब्लडी फूल ना मालूम कोनसी घडी में तुमसे प्यार व्यार कर बैठा ... तुम्हारा सीधा सादा रूप देख कर ... नाउ यू अरे अ डर्टी फेलो ... नोथिंग मोर

ओके नाउ लेट मी गो प्लीज़ ...

नहीं आज के गेम में तुमको शरीक होना पड़ेगा वर्ना मेरा मरा मूह देखोगी सुभा ....

नहीं ... मानव ऐसा नहीं कहते ... समझा करो ... ये ड्रिंक ए नॉन -वेज पार्टियां , ए ... डर्टी कपल चेंज गेम्स .. मुझसे ए सब नहीं होगा ...

मानसी व्हाट'स रोंग विथ यू ... यू आर एब्नार्मल लेडी डु यू नो ... यू आर .. मैड .. सिक ... लेडी ..
तुम क्या चाहती हो ... मैं साधू बन जाऊ , सिर्फ तुम्हे ही .. देखु ... तुम से ही चिपका रहु, ... मेरी गर्ल फ्रेंड्स को बाय बाय कर दू ... उनको देखो .. वो .. स्पा जाती है , हर वक़्त चिकनी .. फेशनेबल ... नजर आती है .. क्या लगती है शॉर्ट ड्रेस में ... और एक तुम ... १६ वि सदी कि नारी ... मेरे लिए ही रखी थी . ....

..वो भी किसी कि बीवीया ही है , क्या उनका कोई स्टेटस नहीं ... क्या उनकी कोई हैसियत नहीं ... तुमसे तुम्हारे गुरुर से ऊँचा स्टेटस है उनका ... फिर भी देखो रोज़ रात को पार्टी में क्या खुल के मिलती है ... गेम्स में एन्जॉय  करती है बिंदास ...

.. मानव मैं ... मैं हु ... तुम जाओ तुम्हे मैं नहीं रोकती ... वैसे पिछले इतने सालो से तुम ने कब मेरा कहा माना
 ... मगर मेरा अपना स्टेटस है , मेरा अपना वजूद है , मैं अपने लिए खूबसूरत हु , मैं वो सब नहीं करुँगी जिसके लिए मेरा मन गवाह न दे ... ये तुम्हारा की-चेन कि तरह एक दूसरे कि बीवियों के साथ बिस्तर बदलने का गन्दा गेम मेरे लिए किसी आत्महत्या से कम नहीं ...

यू डर्टी लेडी ...

या.... आय ऍम डर्टी .... तुम्हे मुबारक तुम्हारा ये .. स्वर्ग ... मेरे माता पिता ने संस्कार दिए है . तुमसे शादी करके भी ... मैंने अपने संस्कारो का साथ नहीं छोड़ा न ही छोड़ूंगी मरते दम तक ... बेशक तुम मुझे ... विरह कि आग में कितना भी तापते रहो ... मैं खिलौना नहीं ... नहीं हो सकता मेरे साथ खिलवाड़ ... समझे तुम ... तुम्हारी झूटी शान ... को मैं दो मिनिट में मिटटी में मिला सकती हु ... बस ख्याल है बिट्टू का .... और अब ... अब तुम दूसरो कि बीवियों से ही गुजर करना ... समझे में मेरे बच्चे के साथ जा रही हु .. यू बाआआआअस्स्स्ड .... तुम ने क्या सोचा ... तुम्हारे कह देने से मैं सच में ... पागल हो जाउंगी , या १५वि सदी कि हो जाउंगी ....
bye  bye . मानव ... इज़ज़त के मायने samajh आ जाएँ उस दिन आ जाना .. तब तक ...  की-चेन इकट्ठे करो दोस्तों के , और झपटो , लूट में जिसका की-चेन मिले ... उसकी बीवी को एन्जॉय करो ... तुम्हारी बीवी ... की-चेन नहीं इंसान है.. जिन्दा इंसान ... देख लेना तुम भी ....

......

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

... To you Scholar Zypsy

 ... To you Scholar Zypsy  

चाँद बनके तुम झरोखे में आया करो 
आजायेंगे हम भी यु ही भटकते
तुम रोज़ बुलाया करो 

सुर्ख गुलो का साथ पसंद है हमें
तुम कभी कभी मेरी खिड़की से
यूँ बे - मौका भी नज़र आया करो 

बहोत शौक से एक किताब रही हु पढ़,
पन्ना-पन्ना बारीक अक्षर तुम 
कुछ तो मदद किया करो 

इक आब-ए-आग का दरिया हो
पुरजोर तुम देखो बहोत आंच है तुम में
कभी कभी बादल बन बरस भी जाया करो 

तुम यु भूला देने का मुझ से अब जिक्र
न किया करो मेरे कातिल भूल जाने के 
काबिल नहीं हो कुछ तो यकीं करो 

सब्र के लूम पर ख्वाबो के सूत
काट रही हु आओगे तुम इक 
दिन इक जाल खुद के लिए बुन रही हु 

आओ तुम्हे चाँद पर ले चलु इस जहां
पे ऐतबार नहीं दुनिया अब मेरे रहने के काबिल
नहीं वहाँ होगा सुकून ऐतबार करो 

कल तेरा जिक्र किया किसी ने जो हमसे
यु बेफिक्र न घुमा करो क्या खबर जान
निकल जाये न कही कुछ ख्याल हमारा भी किया करो

तेरे आने से लेकर तेरे जाने तक का लम्हा
लम्हा याद रहा बस बाकी सदियाँ बीती किन
बातों में याद नहीं कहते हो सब बताया करो ....... aAMEEN