मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

लो हमने तुम्हे अपना बना लिया जनम जनम

लो हमने तुम्हे अपना बना लिया जनम जनम
अपने कविता में सजा लिया कर के  बा-कलम

करे गर जमाना तुझे याद मेरे बहाने से,  इलज़ाम
मुस्कुरा कर दे देना बेवफाई का मेरे सर या रब

चलो कर ले लेते है  किनारे अपनी अपनी
खुदी से, कभी यूँ भी मिला करो हमसे ....

मेरे कातिल क़त्ल तुमने ये कैसे किया
जान भी न निकली और ज़िंदा भी न रहने दिया


ना कर नाकाम सी कोशिशे मुझे समझने कि
यंकी करो ज़िंदगी कि किताब के कुछ
पन्ने तो जार जार हो चुके  या रब ...

मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त

लगने लगी अब हवा कुछ गुलाबी गुलाबी या रब  
ये तो बता  तेरी  यादो का रंग हवाओ में घुला कैसे

तेरे नूर-ए-अब्र-ओ-ताब से रंग आता है कि नहीं
फाल्गुन के रंग अब तक हमने तो कभी देखे नहीं

लो आते आते आ ही गया
मेरे दुश्मन को मुझ पर प्यार या रब
कल तक खंजर हाथ में लिए फिरता था
अब ले आया गुलाब या रब


जाने क्यों तेरा अक्स मेरी तन्हाइयों में उतर रहा है
याद कर तेरा मेरा कोई हिसाब तो बाकी नहीं रहा है

रविवार, 16 फ़रवरी 2014

ख़ाक हुई अब आहें धूं धूं जली तमन्नाएं

ख़ाक हुई अब आहें
धूं धूं जली तमन्नाएं

वो कब तक ढोयेगा
बोझ एक ज़िंदा लाश का

कैसे सुन लेता है वो टप टप
२ आंसुओ कि आवाज़ दूर रह कर भी

सुना ना सैयाद ने शोर मासूम इन
साँसों का इतने करीब हो कर भी

आती है ज़िंदगी कुछ पल मुद्दतो बाद
 जब खुशबु तेरी हवाएं लाती है

मुर्दा चीखे, जिन्दा साँसे
कब्र से देंगी सदायें तुझे
बाँध कर सोने कि जंजीर से
रखा तूने मेरी लाश को जो  

कातिल है तो फिर वार कर
क़यामत का न इंतिज़ार कर
क्या पता कल क्या हो ....

मंजूर नहीं अब मुझको ये सौदे बाजी
न तू नफे कि उम्मीद कर न
मैं अब नुक्सान कि फसल करू

खेल बहोत भा गया उनको कुछ ऐसा वो
तोड़ते रहते है दिल खिलौना समझ बार बार न जाने कैसा

करेंगे वो इंतिज़ार तेरे अल्फाजो का
ज़िंदगी को जिनकी इंतिज़ार परवाज़ो का


और एक गुनाह हुआ
और एक जिन्दा लड़की का जन्म हुआ

आ बैठ पास मेरे कर कतल मेरे अरमानो का
देखे किसके होसले पहले दम तोड़ते है

ले कुछ लहू मेरे अरमानो का
सजा सेहरा तेरे अरमानो का

बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

ज़िंदगी



तनहा नहीं
इक तन्हाई
कि अनकथ
कहानी है
रेत पर चले
पतंगे के पैरो
के निशाँ है
दिए कि आस
के काले घेरे
है, गहरे नीले
समन्दरों कि चादर
पर चलना, छपाक
से उछल कूद जाना
मेंढकी कि मौत
के लिए चमकता
पानी है, चंचल
शोख, रंगीन, सोनमछरिया
और नील गाय का
भोलापन सी, खटते
खटते खट ही गयी
मुहब्बत के नाम जो
मौत के गले लगे
ज़िंदगी उनके जीने का
नाम है ज़िंदगी 

" Happy - Blessed Spring Morning



Wondrous Blue of Spring Sky
A dream of sweet odours 

Seeing a floating hollow cloud
Soft-swift cool breeze touching plains

Dappled butterflies sailing so fast
O' blessed vision improve me

Wild Rose hedge all so sweet
Morning of sweet weather

Live is still young and Love is True
both born-divine together.

 A Very Happy - Blessed Good Morning to you All