शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

#करवाचौथ करो सौदेबाजी नहीं - हर दिन #करवाचौथ है गर रिश्ते को समझ लिया नही तो कुछ नहीं

आज के युग में करवा चौथ जैसे भावनात्मक रिश्ते बचे कहा है
कितने पति पत्नीव्रता है दिल पर हाथ रख कर सोचो
मैं मानती हू पत्निया भी कितनी पतिवर्ता है
फिर क्यों ..... उलझे हो अभी तक महिमामंडन के मकडजाल में
लगे रहो वैसे कौन रोकता है मेरे बोलने न बोलने से भी क्या हो जायेगा ...
कभी सोचा है ... कब तक यु खुद को बहलाते रहोगे, हकीकतो की बारिशो में नहाया करो ..

#करवाचौथ करो - अपनी दादी नानी की सादगी सौम्यता सहनशीलता की दमक और एक साधारण सी लाल बिंदिया और मांग में सिन्दूर
ये तुम्हारे नाटक ... ब्यूटीपार्लर , करवाचौथ की गिफ्ट , करवाचौथ की पार्टी थोडा तो रुको , करवा चौथ दिखावा नहीं करवाचौथ भावना है दिल से जीओ

ये सारी सौदेबाजी करवाचौथ पर जीवनसाथी को गिफ्ट देना - लेना
ये बाज़ार को क्यों रिश्ते में घोल लेते है हम लोग ... ये परंपरा कहाँ से उठा लाये ... ये पारंपरिक त्यौहार है - बाजारू त्यौहार नहीं ...
क्यों गिफ्ट का लेना देना - खत्म करो ये लेन देण का व्यापार ...

एक करवाचौथ को गिफ्ट ले लिया पति से या दे दिया पत्नी को ....
एक बात बताओ ... रोज घर गृहस्थी कोई और चलाता है क्या ... रोज तुम ही सब्जी लाते हो रोज तुम ही बीवी की तारीफ करते हो रोज बीवी तुम्हारा इन्तिज़ार करती है रोज ही वो ढंग से सज सवांर कर रहती है रोज ही वो सुहागन है ... फिर
ये एक दिन का लेना देना ..... सिवाय मूर्ख बनाने या बनने से ज्यादा कुछ नहीं ... 
हर दिन करवाचौथ है गर रिश्ते को समझ लिया नही तो कुछ नहीं  मेरे दादा १०० + के होकर गुजरे .... मेरी दादी ने एक उम्र के बाद व्रत बंद कर दिए थे ... पहले दादी गुजरी फिर दादा | प्रकृति को समझो फिर रिश्ते समझो उनकी गहराई समझो
दिखावे नहीं करो तुमसे हो तो व्रत रखो ... न हो तो मत रखो तुम्हारे जीवन साथी को कुछ नहीं होने वाला वो उतनी ही आयु पायेगा जितना आप उसकी सेहत का हर दिन ख्याल रखोगी , जितना आप की सेहत का वो ख्याल रखेगा , मानसिक शांति मिले वो उपाय करो | 
व्रत करो मगर दिखावा मत करो सौ बातो की एक बात |

हमारी परम्पराए हमारी धरोहर है हमारा मान है सम्मान है हमारी परम्पराए हमारी संस्कृति है लेकिन परम्पराओ में आधुनिकता के ढकोसले मत ठूसो ... परम्पराओ को जीओ जैसी वो है वैसी
चौथ माता की कहानी को समझो उसे सिर्फ सुनकर न बैठ जाओ .|

एक ब्रिटिश शोधार्थी मिली एक कांफेरेंस में उसने २ दिन बहोत बाते की साथ साथ खूब शेयर किये हमरे ये होता है हमारे ये होता है हमारी ये परम्परा हमारी वो परंपरा ... खूब बक बक करने के बाद एक बात वो बड़ी गुस्सा हो गई ... मैं कौनसी कम थी मैंने भी मूह फूला लिया उस से बात नहीं की ... पता है वो क्या बोली
भारत बहोत अच्चा है लिकिन अनीता ... औरत की मानसिकता बहोत अजीब है ... किसी का पति न कमाता है , न बछो की जिम्मेदारी लेता है न घर सम्हालता है , ना कोई काम करता है , अडोस पड़ोस में अफ्फैयर चलता है ,
ऐसी औरत जब पति के लिए व्रत रखती है बजाय उसको तलाक देने के तो ऐसे व्रत का क्या कोई महत्त्व है ...
कई साल गुजर गए ... उसकी बात दिल पर सीधे चोट मारती है और वो सच जिसे मैं पचा नहीं पाई थी वो सच अब बहोत गहरे में पैठ गया है |


आपकी दोस्त - डॉ अनीता राठी -

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