हां मैं ... जानती हु
तुमहे
तुमहारी फितरत
और
तुमहारी चाल
और
तुमहारे ईरादे
और
यही देखकर
मैने ठाना
की
नहीं चाहिये मुझे
वो बैसाखिया
तुमहारे नाम की ...!
---
क्यूंकी आता है मुझे
अकेले चलना
ठोकरे खाना
गिरना
और
गिर कर समहलना भी ll
तुमहे
तुमहारी फितरत
और
तुमहारी चाल
और
तुमहारे ईरादे
और
यही देखकर
मैने ठाना
की
नहीं चाहिये मुझे
वो बैसाखिया
तुमहारे नाम की ...!
---
क्यूंकी आता है मुझे
अकेले चलना
ठोकरे खाना
गिरना
और
गिर कर समहलना भी ll
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें