आज एक लेख शेयर कर रही हु जरा गौर से पढियेगा -- कमेंट करना न भूले ..
आधी रात और नाइट बल्ब कि रौशनी में नंगी कलम कि कोख से उत्पन्न ....
आधी रात नाईट बल्ब कि रौशनी में ... पीसी पर ट्रांस्लितेरेशन ओपन कर कुछ लिखने का मनन हुआ ... लेखिका औरत हो तो मुश्किल तिस पर किसी विदेशी भाषा में लिखे तो ... मानो ... अनपढ़ भी ठप्पा लगा देगा " अरे ये क्या लिखेगी ... कॉपी केट है ... तेरे को और कोई नि मिली ... जो इसकी तारीफ़ करता है ... ऐसा क्या ... गोद में बिठा लिया उसने जो उसके लिखे में तुझे छापने जैसे दीखता है ... या कोई चक्कर है ... लेखिका के साथ ... ' , अरे .. कुछ भी बोलते हो उसके बारे में ... वो बिचारी ... अपना मन बहला लेती है ... अपना चक्कर और इसके साथ ... साले मरवाएगा ... इसके साथ तो नाम न ही जुड़े अच्छा है ... साली पता नहीं आधी रात को कोनसे आशिक को लव लैटर लिखती है ... इसके बाप , दादा ने भी अंग्रेजी में लिखा है जो ये लिखेगी , अंग्रेजो को शर्म आजाये इसका लिखा पढ़ ले तो ... " ... मेरे खुराफात दिमाग में लिखने बैठते ही ...ये शब्द खली बर्तन में कंचे कि सी टंकार मारते है ... और फिर लगी लिखने ...
" गली में कुत्तो के भोकने कि आवाजे सुनाई दे रही थी ,
सारे ब्रोकर उठ कर सज धज कर बुकी कि और चल दिए
सुबह, हुई ... सारे कुत्ते गहरी नींद में जूते पहने पहने ही सो गए ..
सड़के चीख रही थी फटे पोस्टरो से निकलते हीरो देख कर रो रही थी ........ विविध BHARTI पर वही पुराना गाना बजने लगा
"- ... नायक नहीं खलनायक हु में , जुल्मी बड़ा दुःख दायक हु मैं ....
इलेक्शन का टाइम और ये लिखा मेरी नंगी कलम ने ... नंगी का मतलब ये ना समझ लेना ... कि में कलम को कपडे पहनाती हु ... नंगी मतलब .... जब ये बोलना शुरू होती है तो साफ़गोही से ... बिना शब्दो को गोल गोल घुमाये बोलती है ... आदत ही ख़राब है ... पर करे भी क्या ....
भारत में स्त्री-लेखिकाओ का चित्रण .... वो उभरती हुई लेखिकाएं जिनकी मात्र भाषा तो हिन्दुस्तानी भाषाओ में से कोई एक है , लेकिन वो लिखती है ... अंग्रेजी भाषा में .. वो लेखिकाएं जिन्होंने अपना सर्वस्व होम कर दिया लेखन के लिए , शब्दो कि साधना में ... मिला क्या ,... चाहा क्या ... बिन चाहे कुछ मिला भी तो ... सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या मिला ....
डॉ. अनीता राठी की कलम से -
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