ये क्या हो गया है तुम्हे
राशन की कतार में
खड़े खड़े थक गए इस कदर
की सुकून के पलों में
बातें होती है
बढती महंगाई की
पानी के बिल की
बिजली के बल्ब बदलने की
लो वोल्ट उपकरणों की
हाई ब्लड प्रेशर की
लो लेवल राजनीति की
घटिया मिलावटी मसालों की
...... ये क्या हो गया है तुम्हे
होती है घर की बैठक में
अब हलचल कम ...
दोस्तों का आना जाना है कम
उनका पेट्रोल जलता है
हमारा गैस का सिलेंडर
उनका दिल जलता है
हमारी भावनाएं दम तोडती है
अब कहाँ वो निश्छल हंसी
अब कहाँ वो ठहाके
गलती से अनु तू जो हंस भी ली
गली वाले तुरंत पूछ लेंगे
क्या मिल गया जो इतना हस रही हो
क्या है ऐसा जो हर वक़्त मुस्कुराती हो
कैसे कहू , मैं हु न
क्या होना काफी नहीं
तुम हो न क्या तुम्हारा होना
काफी नहीं ... ढूंढते हो तुम
किसको इस संगदिल
हवा में, खोये हो क्यों
इस बाढ़ में, क्यों लगा है सोच
इस बात का , कहीं कल का
अखबार न करदे उद्घोष
लगेगा टैक्स, आएगा बिल
ऑक्सीजन लेने का
और को CO२ डिस्पेंस का
सुनो , कालर को ठीक कर लो
थोड़ी सी छाछ पी लो
हल्का नशा ठीक रहेगा
नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।
नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।
राशन की कतार में
खड़े खड़े थक गए इस कदर
की सुकून के पलों में
बातें होती है
बढती महंगाई की
पानी के बिल की
बिजली के बल्ब बदलने की
लो वोल्ट उपकरणों की
हाई ब्लड प्रेशर की
लो लेवल राजनीति की
घटिया मिलावटी मसालों की
...... ये क्या हो गया है तुम्हे
होती है घर की बैठक में
अब हलचल कम ...
दोस्तों का आना जाना है कम
उनका पेट्रोल जलता है
हमारा गैस का सिलेंडर
उनका दिल जलता है
हमारी भावनाएं दम तोडती है
अब कहाँ वो निश्छल हंसी
अब कहाँ वो ठहाके
गलती से अनु तू जो हंस भी ली
गली वाले तुरंत पूछ लेंगे
क्या मिल गया जो इतना हस रही हो
क्या है ऐसा जो हर वक़्त मुस्कुराती हो
कैसे कहू , मैं हु न
क्या होना काफी नहीं
तुम हो न क्या तुम्हारा होना
काफी नहीं ... ढूंढते हो तुम
किसको इस संगदिल
हवा में, खोये हो क्यों
इस बाढ़ में, क्यों लगा है सोच
इस बात का , कहीं कल का
अखबार न करदे उद्घोष
लगेगा टैक्स, आएगा बिल
ऑक्सीजन लेने का
और को CO२ डिस्पेंस का
सुनो , कालर को ठीक कर लो
थोड़ी सी छाछ पी लो
हल्का नशा ठीक रहेगा
नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।
नींद आजाये सुकून से
इतना प्रयत्न ठीक रहेगा।
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