तनहा नहीं
इक तन्हाई
कि अनकथ
कहानी है
रेत पर चले
पतंगे के पैरो
के निशाँ है
दिए कि आस
के काले घेरे
है, गहरे नीले
समन्दरों कि चादर
पर चलना, छपाक
से उछल कूद जाना
मेंढकी कि मौत
के लिए चमकता
पानी है, चंचल
शोख, रंगीन, सोनमछरिया
और नील गाय का
भोलापन सी, खटते
खटते खट ही गयी
मुहब्बत के नाम जो
मौत के गले लगे
ज़िंदगी उनके जीने का
नाम है ज़िंदगी
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