लो हमने तुम्हे अपना बना लिया जनम जनम
अपने कविता में सजा लिया कर के बा-कलम
करे गर जमाना तुझे याद मेरे बहाने से, इलज़ाम
मुस्कुरा कर दे देना बेवफाई का मेरे सर या रब
चलो कर ले लेते है किनारे अपनी अपनी
खुदी से, कभी यूँ भी मिला करो हमसे ....
मेरे कातिल क़त्ल तुमने ये कैसे किया
जान भी न निकली और ज़िंदा भी न रहने दिया
ना कर नाकाम सी कोशिशे मुझे समझने कि
यंकी करो ज़िंदगी कि किताब के कुछ
पन्ने तो जार जार हो चुके या रब ...
मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त
लगने लगी अब हवा कुछ गुलाबी गुलाबी या रब
ये तो बता तेरी यादो का रंग हवाओ में घुला कैसे
तेरे नूर-ए-अब्र-ओ-ताब से रंग आता है कि नहीं
फाल्गुन के रंग अब तक हमने तो कभी देखे नहीं
लो आते आते आ ही गया
मेरे दुश्मन को मुझ पर प्यार या रब
कल तक खंजर हाथ में लिए फिरता था
अब ले आया गुलाब या रब
जाने क्यों तेरा अक्स मेरी तन्हाइयों में उतर रहा है
याद कर तेरा मेरा कोई हिसाब तो बाकी नहीं रहा है
अपने कविता में सजा लिया कर के बा-कलम
करे गर जमाना तुझे याद मेरे बहाने से, इलज़ाम
मुस्कुरा कर दे देना बेवफाई का मेरे सर या रब
चलो कर ले लेते है किनारे अपनी अपनी
खुदी से, कभी यूँ भी मिला करो हमसे ....
मेरे कातिल क़त्ल तुमने ये कैसे किया
जान भी न निकली और ज़िंदा भी न रहने दिया
ना कर नाकाम सी कोशिशे मुझे समझने कि
यंकी करो ज़िंदगी कि किताब के कुछ
पन्ने तो जार जार हो चुके या रब ...
मेरी हस्ती पर छाने लगा है वो एक बादल
हवाओ पे छाया रहता है जो हर वक़्त
लगने लगी अब हवा कुछ गुलाबी गुलाबी या रब
ये तो बता तेरी यादो का रंग हवाओ में घुला कैसे
तेरे नूर-ए-अब्र-ओ-ताब से रंग आता है कि नहीं
फाल्गुन के रंग अब तक हमने तो कभी देखे नहीं
लो आते आते आ ही गया
मेरे दुश्मन को मुझ पर प्यार या रब
कल तक खंजर हाथ में लिए फिरता था
अब ले आया गुलाब या रब
जाने क्यों तेरा अक्स मेरी तन्हाइयों में उतर रहा है
याद कर तेरा मेरा कोई हिसाब तो बाकी नहीं रहा है
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