जल रही होलियाँ
नेकी के इफाजतदारो कि
वक्त वो आया
इज़ज़त ही नहीं इज़ज़तदारो कि
फूलो ने कांटो से कि दोस्ती
भंवरे है बैचैन रंग बदलते रंगो के हकदारों कि
लिए हाथ में खंजर वो
जाता है करने पूजा पत्थर के भगवानो कि
सूली पे लटका हर एक वो
जिसने न कि चाकरी नाके के ठेकेदारो कि
नेकी के इफाजतदारो कि
वक्त वो आया
इज़ज़त ही नहीं इज़ज़तदारो कि
फूलो ने कांटो से कि दोस्ती
भंवरे है बैचैन रंग बदलते रंगो के हकदारों कि
लिए हाथ में खंजर वो
जाता है करने पूजा पत्थर के भगवानो कि
सूली पे लटका हर एक वो
जिसने न कि चाकरी नाके के ठेकेदारो कि
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