तेरे करीब रह कर
भी क्यों दूर हु।
मेरे मौला बता तेरी
रहमतो से क्यों दूर हु।
काठ की हांडी से रिश्तो में
पकाया भात प्यार का
फिर अपने ही आप से
क्यों खफा हु मैं l
कोरे कागज पर लिखे
कुछ रिश्ते मुहब्बत
की कलम से, अब रकीबो
की बस्ती में खुश हु मैं।
अपनों की बात नहीं
अपने ही खून के प्यासों की
हमराह हु मैं।
हुआ ये गुनाह मुझ से
मुहब्बत की राह पर
चल कर कैसा या रब
के अब अपनों के साधे
निशानों पर हूँ मैं।
Dr-Anita Rathi
एक सांस अपने हिस्से
की क्या मांगी मैंने
हवाओं को गुमान मुझे
जिन्दगी देने का हो रहा या रब
तेरे करीब रह कर
भी क्यों दूर हु।
मेरे मौला बता तेरी
रहमतो से क्यों दूर हु।
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