बादलों से घिरी सुबहो की मल्लिका ने
बिखेर दी इन्द्रधनुषी खुशबुयें, आलिंगन
किया जब पुरवाई सी हवाओं ने ......
भीगी भीगी सी डालियों ने किया नव कलरव
गीत गया कोयल ने खुशियों में नव पल्लव
नव श्रींगार हो रहा धरा का हो मस्त मगन मगन
नाच उठा आज गगन भी घूम घूम आँगन आँगन
बूँद बूँद जी उठी .... सुन्दर सपन सलोनी सी
मौसम ने जो ली अंगड़ाई खिल गया दिल चमन चमन।
Osm
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना
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