जब जिंदगी किसी तूफान में फंसी हो तो सहज सरल चलते चलो हवाओ का रुख बदलेगा तो स्वयं को और गति से आगे बढ़ते पाओगे वैसे ही जैसे उफनती लहरों पर जैसे ये नैया का अस्तिव है
अब कहां मायने रखता हैं वो तेरा इंतिजार, आना ना आना ... शांम ढलने लगी हैं ... एकांत सुहाना लगता हैं ..
तपती रेत के समंदर पर ... खुले आसमान को मेहसूस करना ... ज़िन्दगी कि ट्रेंन कि रफतार को खुली खिडकियों से देखना ... जीवट सुख होता हैं ...
मसान जगह2 दिखे ... मगर ध्यान क्षितिज से जा चिपका उगता सूरज .. ढ़लती शांम से देखा ...
गहरा लिखने के लिए गहरा जीना पड़ता है पानी मे रहकर खुद को रिसते बहते खत्म होते देखना होता है आसान नही कागज पर जज्बात उकेर देना, ना जाने कब स्याही बनकर घुल जाना होता है स्याही एक दिन रीतेगी और लिखा हुआ किसी कागज की कतरन पर इक नजर को आराम पहुंचा रहा होगा तब तक घुल जाना ही अनवरत रहे तो जीवन सार्थक एक कलम का ...
पत्ते शाखो से बिछड़कर कब जी पाते है ये जड़ो को मालूम होता है मगर वो जमीन में सीना धँसाये सब मौन स्वीकृत करती है क्योंकि नवसृजन ही उनका कर्म निर्धारित है
चलने तो लगे हम इंन राहो पर
बहोत खूबसूरत सी जान कर
रुको थोड़ा समझो ये कहीं
तबाही के घर का रास्ता तो नहीं
न बात करो अब चाँद तारो की कहानीया सुनने से अब नींद नहीं आती, बिखरा पड़ा है मेरे ही घर में मेरा वज़ूद , तुम आओ तो आँगन बुहार लू । उगता सूरज डूबता चाँद, तेरी याद के साथ ही आते जाते रहते है। आधी रात का मंजर मुझे बहोत अच्छा लगे है । चाँद भी तेरी तरह आवारा लगे है भटकता ही रहता है। तुम्हारी आहट ज्यूँ मोगरे की महक, घर भर लेती हु अब सिर्फ इन खुश्बुओ से।
यादें तो यादें है यादों का क्या ... 💐💐💐
राहीराज
बहुत बढ़िया
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