मंगलवार, 16 जुलाई 2013

.यादें ...10



मुस्कुराती चांदनी रातो में जब ताप चढ़ने लगता है, ऐसा लगता है मानो सब कुछ पिघल कर, राख  हो जाना चाहता है , तुम तो कहीं नहीं, अब सिर्फ यादें है, एक अजीब सी बैचेनी है रूहानी बाते , बड़ी रूमानी बाते लगती है ,  लेकिन कभी कभी सोचती ह, क्यों पसंद करते है हम वो हलकी सी गंध किसी अपने के शाने की, क्यों उसकी महक से महकने लगती है ये बगिया ... सोचते सोचते चल ही रही थी की ... अचानक  सड़क की छाती पर बने बड़े से स्पीड ब्रेकर ने मेरी यादों के कारवे को और गति दे दी , ये स्पीड ब्रेकर भी अजीब होते है थोड़ी थोड़ी दूरी पर मिलते  रहते है, और अपने नाम से बिलकुल जुदा , स्पीड ब्रेक करने की बजाय बढा देते है ...  चलते चलते बहोत दूर निकल गए हम ... थक रहे थे तुम भी और मैं भी , तुम इस ख़याल से की हम और आगे चलते चले, तुम निश्चिन्त , मगर मैं मैं तो गुमसुम सी चल रही थी, सिहरन थी, अजीब सी , की साँसों के तार टूट ते से लगे अचानक या भी ख़याल आने लगा , खो न जाऊ कहीं , फिर लगा न पीपल के पेड़ से लिपट अमर बेली बनी रहो इसी सेतु से जी पाओगी , जानते हुए भी की .. की ... तुम्हारी रगों से सारा का सारा पारा उस हाथ की गिरफ्त में आ गया था जो थाम था तुमने इतनी जोर की ... जरा पकड़ ढीली पड़ती तो हाथ पर तुम्हारी उँगलियों के निशाँ बन गए ... रक्त रंजित हाथ , गवाह थे तुम्हारी मजबूत पकड़ के ऐसा नहीं था की मुझे यकीं नहीं था पर मैं चल रही थी नहीं तुम चला रहे थे मुझे ... एक ऐसी सड़क पर जिसके दोनों और अलग अलग सड़के और थी , हाँ ठीक वैसे ही जैसे ३ लेन सड़क बहोत मुश्किल था बीच वाली राह चुन कर चल पाना वो भी स्पीड ब्रेकर्स के साथ, बस एक बात अछि थी उस सड़क पर तुम्हारे साथ थी ... पसीने से लथपथ ... दोपहर ... हम चलते रहे, शाम का ठंडा झोखा, दिल के मौसम को और सुहाना कर जाता, फिर रात आती तो लगता, ...................................... "लो कुछ पल साथ बैठ कर गम खाते है और सुकून पीकर थोडा ठिठक लेते है ...."

              दॊनो   ओर सुनसान सड़क ,  कनाडा की सुनसान सी वो एक सड़क ... सुभा होने से पहले उस सड़क से चलते चलते याद आंये लगी ....... रोबर्ट ब्राउनिंग की एलिज़ाबेथ  ... लास्ट राइड टू-गेदर .... और न जाने क्या क्या ..... फिर तुम्हारा चेहरा देखा मासूमियत भरा ... सोच नहीं सकती थी वैसा जैसा ब्रोविंग का पजेसिवे प्रेमी करता है प्रेमिका के साथ, .. फिर सिहर उठी अपने ही डर से , जो लाज़मी था इस नव-विक्टोरियन युग में ... या कहूँ ... विज्ञान के सैटलाईट युग में .. कुछ भी संभव है .... याद आगया एक जोक .... एक प्रेमिका प्रेमी को दोषी ठहराती है .. पिछले नौ महीनो से तुम मुझसे फ़ोन पर ये ... ऐसी वैसी बातें कर रहे हो ... प्रेमी ने कहा तो .... प्रेमिका तो क्या अगले महीने तक खुशखबरी सुना दूंगी ...... बड़ी शर्म आई सोच कर भी उफ़ ..... आज कल के प्रेमी -प्रेमिका, हाई - टेक लव .... वापस लौटी इस ख़याल से तो देखा तुम वैसे ही मेरा हाथ थामे चलते जा रहे थे ... क्या वाकई हम निकल चले लास्ट राइड पर .... और वो आजू बाजू वाली सड़के वो साथ चलेंगी क्योंकि हाई वे पर चलना था ..... बीच सड़क चलना चुना था ..... लास्ट राइड पर ... साथ साथ ..... बिना सवालों की रातों के .. बिना जवाबो के दिनों के ..... तुम रुकते भी तो कहाँ ... कोई दरखत नहीं था हाई वे पर .... हाँ जगह जगह तुम कभी कभार दुसरे हाथ से ... हमारी हम राही वो झर-बेरी के बेर चख लेते ....... कांटो की परवाह किये बिना ... और यही मुझे रिझा जाता ..... कमाल के गड्स है .... लॉन्ग राइड पर ... भूखे , पियासे , सिर्फ और सिर्फ झर-बेरी के खट्टे मीठे फलो के सहारे ....... गुजर कर पाओगे ....... क्या कहूँ ...... बस यादें है .... याद आती है .... बातें बातें तो जी जाती है ओर ... जी कर उस्सी सांस के साथ ख़तम हो जाती है जिस सांस के साथ कही सुनी ... यादो का क्या ?  यादें तो याद आती ही है…. बातें कभी कभी भूल भी जाती है………  



4 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्त ही वह शख्स होता है जो आपके जीवन के
    सभी राज जानता है। दोस्ती की कसम देने की देर
    होती थी की काम हो जाता था। फिर सब एक-दूसरे
    की कमजोरी भी जानते थे। दोस्ती में बिना शब्दों के
    अभिव्यक्तियाँ भी बहुत कुछ कह जाती हैं। आखिर
    ये सब दोस्ती में ही तो चलता है। यह एक
    ऐसा रिश्ता है जो मामूली घटनाओं और
    यादों को भी खास बना देता है। हमारे जहन में ऐसे
    बहुत से पलों को ताउम्र के लिए कैद कर देता है। ये
    पल वापिस तो कभी नहीं आते पर हाँ आज भी जब
    आप अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं तो अब उन
    बातों को याद कर जरूर हँसी आती होगी।

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  2. anita ji yaado ka varnan kafi kiya he.par mujhe aesa lag raha he ki kuch or bhi kaha ja sakta tha.aap ruk kyo gaye,me umeed karta hu aage bhi padne ko milega.mujhe 25 varsha purv ki line yaad aa gaye, chama sahit,,
    TUMSE BICHURE SADIYA BITI,
    PHIR BHI,
    DIL ME YAAD TUMARI,
    AESE HE, JAISE,
    KISI JALE HUE KAGAZ PAR
    harf---- KISI AFSANE KE HO....
    SADAR NAMAN.

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    1. जी अवश्य ये यादों का कारवाँ यु ही है जब जब फुर्सत के पल होते है , बस फुर्सत ही नहीं होती ..... शुक्रिया इतनी सुंदर टिपण्णी कर मेरी पोस्ट को स्नेह देने का , होसला अफजाही करने का

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