गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

पुराने को अलविदा ...??? 

पुराने को अलविदा ...???

पुराना तो बहोत अजीज होता है चाहे साल हो या सवाल  पुराने से रिश्ता गूढ़ होता जाता है पुराना घर पुराना दोस्त पुराना पडोसी पुरानी किताबे किताबो में राखी  वो डायरी ... और उस डायरी के एक एक पैन पर खींची वो ज़िगज़ाग  लाइन ... कितना अपनापन होता है उस पुराने दर्द से जो दिल के किसी कोने में रिस्ता रहता है जिसकी किसी भी याद को आपने साल दर साल नयी नहीं होने दी क्यूंकि पुराना साल लौट के नहीं आता मग नया जब तक पुराना नहीं हो जाता तब तक अपना सा लगता भी कब है 

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