गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

व्यापारी .. इस हाथ दे उस हाथ ले ... रिश्तो की नर्माहट गर्माहट कहाँ खो आते है पलभर में . बच्चो जैसी बातो पे लड़ तो लेते है ..तुम हमारे घर नहीं आयेहम क्यों आये ...तो फिर बच्चो की तरह एक हो भी क्यों नहीं जाते .. हर पल खुश रहो की सीख देना बेमानी सा लगता है ... और जो हर पल खुश ही हो वाकई में .... वो इस जहां का कहाँ लगता है

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