मिले थे हम भी उस से कल
याद उसे हो न हो वो पल
आजादी कि खुली सड़क पर
तंग हाल घूम रही थी ज़िंदगी
इक घुमंतू कि गाडी के पहिये
सी, सर्द - जर्द रातों में ओस सी
जकड़न भरे सीने में जहाँ हर पल
बूढ़े और बचपन में मौत रही थी ढल
आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी
शौक कहाँ था उसको भी वो
एक नौ-जवान जो कल तक था
माँ कि आस, पिता का आसरा
उस जवान लाश के ताबूत पर
ओढ़े लाल-चुनर टूटी कांच-चूड़ी सी
और बेहाल पड़ी एक जवान लाश सी
आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी
याद उसे हो न हो वो पल
आजादी कि खुली सड़क पर
तंग हाल घूम रही थी ज़िंदगी
इक घुमंतू कि गाडी के पहिये
सी, सर्द - जर्द रातों में ओस सी
जकड़न भरे सीने में जहाँ हर पल
बूढ़े और बचपन में मौत रही थी ढल
आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी
शौक कहाँ था उसको भी वो
एक नौ-जवान जो कल तक था
माँ कि आस, पिता का आसरा
उस जवान लाश के ताबूत पर
ओढ़े लाल-चुनर टूटी कांच-चूड़ी सी
और बेहाल पड़ी एक जवान लाश सी
आजादी कि खुली सड़क पर
बेहाल घूम रही थी ज़िंदगी
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