गुरुवार, 23 जनवरी 2014

<3 To you Scholar Zypsy  <3

तेरी मासूम सी इक मुस्कराहट ने बेबसी दी है
बे-सबब इस ज़िंदगी को क्या खूब ख़ुशी दी है

दौर-ये-ज़िंदगी भटकी बहोत मंजर-ए-खौफ में
बेमकसद इस रूह को सुकून-ए-ज़िंदगी दी है

रख दिए  जो हिम्मत से समंदर के सीने पे
मैंने कदम अनजाने उन कदमो तले जमीं दी है

बहोत नमी है आँखों कि पलकों तले सोचती हु
सदियों बाद ही सही तुमने कुछ हंसी तो दी है

सिर्फ यही इक बात नहीं कि उजाले नहीं मेरे हिस्से में
हथेली पर रखे दिए ने उम्मीदो कि रौशनी दी है

आज जिन्दा हु तो लिखती हूँ बहोत मैं
मुर्दा हाथो में जान तुम्ही ने तो दी है  .......... Aameen

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