... To you Scholar Zypsy
चाँद बनके तुम झरोखे में आया करो
आजायेंगे हम भी यु ही भटकते
तुम रोज़ बुलाया करो
सुर्ख गुलो का साथ पसंद है हमें
तुम कभी कभी मेरी खिड़की से
यूँ बे - मौका भी नज़र आया करो
बहोत शौक से एक किताब रही हु पढ़,
पन्ना-पन्ना बारीक अक्षर तुम
कुछ तो मदद किया करो
इक आब-ए-आग का दरिया हो
पुरजोर तुम देखो बहोत आंच है तुम में
कभी कभी बादल बन बरस भी जाया करो
तुम यु भूला देने का मुझ से अब जिक्र
न किया करो मेरे कातिल भूल जाने के
काबिल नहीं हो कुछ तो यकीं करो
सब्र के लूम पर ख्वाबो के सूत
काट रही हु आओगे तुम इक
दिन इक जाल खुद के लिए बुन रही हु
आओ तुम्हे चाँद पर ले चलु इस जहां
पे ऐतबार नहीं दुनिया अब मेरे रहने के काबिल
नहीं वहाँ होगा सुकून ऐतबार करो
कल तेरा जिक्र किया किसी ने जो हमसे
यु बेफिक्र न घुमा करो क्या खबर जान
निकल जाये न कही कुछ ख्याल हमारा भी किया करो
तेरे आने से लेकर तेरे जाने तक का लम्हा
लम्हा याद रहा बस बाकी सदियाँ बीती किन
बातों में याद नहीं कहते हो सब बताया करो ....... aAMEEN
चाँद बनके तुम झरोखे में आया करो
आजायेंगे हम भी यु ही भटकते
तुम रोज़ बुलाया करो
सुर्ख गुलो का साथ पसंद है हमें
तुम कभी कभी मेरी खिड़की से
यूँ बे - मौका भी नज़र आया करो
बहोत शौक से एक किताब रही हु पढ़,
पन्ना-पन्ना बारीक अक्षर तुम
कुछ तो मदद किया करो
इक आब-ए-आग का दरिया हो
पुरजोर तुम देखो बहोत आंच है तुम में
कभी कभी बादल बन बरस भी जाया करो
तुम यु भूला देने का मुझ से अब जिक्र
न किया करो मेरे कातिल भूल जाने के
काबिल नहीं हो कुछ तो यकीं करो
सब्र के लूम पर ख्वाबो के सूत
काट रही हु आओगे तुम इक
दिन इक जाल खुद के लिए बुन रही हु
आओ तुम्हे चाँद पर ले चलु इस जहां
पे ऐतबार नहीं दुनिया अब मेरे रहने के काबिल
नहीं वहाँ होगा सुकून ऐतबार करो
कल तेरा जिक्र किया किसी ने जो हमसे
यु बेफिक्र न घुमा करो क्या खबर जान
निकल जाये न कही कुछ ख्याल हमारा भी किया करो
तेरे आने से लेकर तेरे जाने तक का लम्हा
लम्हा याद रहा बस बाकी सदियाँ बीती किन
बातों में याद नहीं कहते हो सब बताया करो ....... aAMEEN
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