रविवार, 28 जनवरी 2024

यादे तो यादे है यादों का क्या

 उसने कहा आ जाओ अंदर डरो नहीं ...दिल है मेरा ईट  का मकान नहीं

 ..डरते डरते जा बैठी एक कोने में ..सहसा नज़र घुमा के देखा ..बहोत घुटन थी ... उसके दिल की काली कोठरी में खुंटिया तो थी नहीं .. कच्चे सूत की तनी थी तनी पर कड़िया पिरोई थी जिसमें लटकी थी कुछ रोती हुई आत्माएं ... मैंने पुछा सुनो...

 ये कौन है ?? 

...ये वो पागल औरते और लडकिया है जो ये समझती थी की मैं इनको चाहता हु ... प्यार की मारी है l

... मैं मरने वाली ho गई थी उस के प्यार मैं बस दिल में कभी इतने करीब से ना झंlखा था उसके

 ... मैंने कहा सुनो .. बाकि की कड़ियों में ..तुम्हारी अंतरात्मा के टुकड़े लटका लेना ... मेरा  ... नाम भूल जाओ .. ले जाओ अपनी यादो की बरात वापस ......

यादे तो यादे है ....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें