रविवार, 28 जनवरी 2024

यादें तो यादें है

 हाँ #kalyugi  हुँ मैं 


मैं रिश्तों की गुलामी नही मैं रिश्तों की कद्र करती हूं, हर एक रिश्ते को खूब जिया समझा और फिर उकेर दिया जो जैसा था उसे शब्दो मे , क्योंकि कलयुगी हुँ मैं। 


और आज मेरा बरसो का इंतिजार काम आया जब मेरी कलयुगी की चुनरी लहराई ... शब्दो की इस संरचना को आज बोधि प्रकाशन ने पूरी साज सज्ज़ा के साथ मेरे सुपुर्द करने का मानस बनाकर ये चुनरी ओढाई ...


Thrilled to See The Cover Of my Second brain child my  New Book of 100 structured English Poems  #KALYUGI

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