स्वागत है मेरी साहित्यिक रचनाओं की दुनिया में
मुझे नदी होना है
मैं गहरी होऊ
चाहे जितनी मगर
मिलना है समंदर से
ताकि खो जाउ
एक वजूद होकर।
मैं जी लू
अनन्त अनगिनत
गहराईयों को
और तार दो
तुम मुझे इस
भव से ।
Dr-Anita Rathi
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