रविवार, 28 जनवरी 2024

कविता

 सुनो

तुम ले लो ये

तुम्हारा कच्चे सूत

का स्नेह 

ये तकली और ये

तुम्हारे ख्यालों का चरखा

और

लौटा भी दो

मुझे मेरी खामोशियों

की नींद। 

सुकून और बेकसूर ख्वाब

या

रखो हिना रची हथेली

पर अपनी ये हथेली

और करो

मन का पाणिग्रहण ।

डॉ. अनीता राठी 21।01।2024

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