स्वागत है मेरी साहित्यिक रचनाओं की दुनिया में
सुनो
तुम ले लो ये
तुम्हारा कच्चे सूत
का स्नेह
ये तकली और ये
तुम्हारे ख्यालों का चरखा
और
लौटा भी दो
मुझे मेरी खामोशियों
की नींद।
सुकून और बेकसूर ख्वाब
या
रखो हिना रची हथेली
पर अपनी ये हथेली
और करो
मन का पाणिग्रहण ।
डॉ. अनीता राठी 21।01।2024
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