रविवार, 28 जनवरी 2024

कविता

 कुछ ख्वाब 

उसके 

मेरे कमरे की 

एक 

किताब में 

संजोकर

रखे है ।

ताकि पढ़ लू

जब जी 

चाहे 

Dr-Anita Rathi

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें