ऐसा नहीं कि उसकी आँखों में नमी न थी, अश्रु ग्रंथियां काम करती थी बल्कि पनीली सी आँखों में जो देखता खो सा जाता ... गजब एक आकर्षण था उसकी आँखों में, जवानडिस से थोडा पीलापन था मगर फिर भी वो आँखें ... कुछ खोजती सी .. भटकती सी ... एक जगह ठहर जाए आदत नहीं थी ... कंचे कि गोली सी हर वक़्त लुढकती रहती ... कोई पत्ता भी हिलता तो पलकों के झरोखो से एक ही सांस में सब कुछ कोना कोना स्कैन कर लिया जाता और मजे कि बात बात करते तो पता चलता इमीटेट भी कर लिया ... किस रंग का ड्रेस पहना है , कोनसी बुक पढ़ रहा है, किसकी आँखे किसको देख रही है किताब कि बजाये ... व्हाइट शर्ट वाले रिन कि सफेदी ... वाले भाईसाहब का हरे दुपट्टे वाली के साथ नोट्स बनाने का क्या राज है ... सुन वो इंजन साहब आज दिख नहीं रहे ... इंजन साहब कौन यार क्लियर बता .... मेरे बस कि नहीं तेरी ये भाषा ...नहीं न सुन तो .... अरे वही ... इंजन साहब ... ब्लैक ब्यूटी ... जो हरवक़त रेड & वाइट कि एक न एक सिगरेट सुलगाये लगातार धुँआ उगलते रहते है .. तेरी आँखें है कि टिकती नहीं ... तुम टॉप कैसे कर ली ... हलकी सी कातिल मुस्कान से जवाब सिर्फ मुस्कान ... सुन कई दिनों से लवर'स पॉइंट पर नहीं गए चल चलते है ... नहीं ओय चुप कर ... तेरी ये कंचे सी आँखें कभी इधर कभी उधर ... एक न एक अटक जाता है फिर उस से पीछा छुड़ाओ। तो क्या हुआ ... चल पोस्ट ऑफिस चल ... रोज एक लैटर आता उसका , उसके पेन - फ्रेंड का ... बैंगलोर से ... खुश होती और फिर वही .. वो लैटर पढ़ कर उसकी पनीली आँखों में एक अजीब सी ख़ुशी दिखती ... चल यार कल भी ... बॉयज ने बहोत परेशां किया , ... वैसे भी चार बज गए ... लेट हो जायेंगे ... ये तो शुक्र कर तेरे मजनू के दोस्त ने बचा लिया ... वर्ना ... वर्ना क्या ... उठा के ले जाते तुझे ... और ये कंचे घुमा घुमा के देखो ... अरे नहीं वो देखने लायक भी है… कोन ... वो ही mr. टूटे फूटे ... देख तू ये आदत छोड़ दे ... ये .. इन् नमूनो के नामकरण कि .... अब बता न कौन टूटा फूटा ... वो देख ... वो गेट से एंटर किये ... उफ्फ्फ अब अब क्या करें ...इस लवर'स पॉइंट पर बैठने का यही नतीजा है ... और बैठ .... चल कोई नहीं . ... देख लेंगे आने दे ... .... एई ... सुनो इधर आओ .. गाडी में बैठे कुछ गुण्डे टाइप में से एक टूटे फूटे ... ने पुकारा ... तुम तब भी बाज नहीं आई .... कंचे सी आँखे घुमा उनको देख कर फिर दूसरी तरफ घुमा ली ... सुना नहीं तुमने ए ई ..हे तुम ... रहा हु सुना नहीं .... इधर आओ .... जान निकली नहीं तो बाकी बची नहीं उसकी ... सुन कुछ कर ... अब में क्या करू ... इन् आँखों कि ...... आपकी पनीली आँखों का कमाल है .... जाइये बुला रहे हा जाना तो पड़ेगा , सुन कार से दूर रह कर सुन ले क्या कहते है , फिर में हु न तेरे साथ दर मत जा , वरना .... मुसीबत कि जब खुद कार से उतर कर आ गई तो ... मैंने दो चार रसीद करदेने है ... बवाल हो जायेगा ..... जाओ तुम सुन लो क्या कहते हा हमारे आदरणीय सीनियरस ...... डरी सहमी सी गई .. जी , सुन तू .. मन्ने चोखी लागे स .... ता कह रयो हूँ तू ये तेरी गोटियां इतनी न घुमाया कर , ... और हाँ ये तेरी फ्रेंड को कह ... दादा गिरी न किया करे .... और हाँ तुम दोनों अच्छी लडकियां हो मैं तुम्हारा रेस्पेक्ट करूँ हु .... चल जा और अब घर जा या जगह सिंसरे लडकियां के बैठने कि नि .... ठीक ... ओह गॉड .... गाडी चली गई ... हम भी ... तौबा करे ... कि जान बची ........ लेकिन हाँ ... वो सीनियर अब बहोत अच्छे लगते है .... गुंडागर्दी के भी कुछ एथिक्स हुआ करते थे ...... और आज आज तो ... अब क्या कहे ... बस बातें है .. वर्त्तमान ... अतीत के बीच के कुछ यादों के हिचकौले है .... फिर भी बातें तो बातें है .... बातो का क्या ... बस यादें याद आती है ...
सोमवार, 9 दिसंबर 2013
यादें याद आती है ... बातें बातें भूल जाती है ..........
ऐसा नहीं कि उसकी आँखों में नमी न थी, अश्रु ग्रंथियां काम करती थी बल्कि पनीली सी आँखों में जो देखता खो सा जाता ... गजब एक आकर्षण था उसकी आँखों में, जवानडिस से थोडा पीलापन था मगर फिर भी वो आँखें ... कुछ खोजती सी .. भटकती सी ... एक जगह ठहर जाए आदत नहीं थी ... कंचे कि गोली सी हर वक़्त लुढकती रहती ... कोई पत्ता भी हिलता तो पलकों के झरोखो से एक ही सांस में सब कुछ कोना कोना स्कैन कर लिया जाता और मजे कि बात बात करते तो पता चलता इमीटेट भी कर लिया ... किस रंग का ड्रेस पहना है , कोनसी बुक पढ़ रहा है, किसकी आँखे किसको देख रही है किताब कि बजाये ... व्हाइट शर्ट वाले रिन कि सफेदी ... वाले भाईसाहब का हरे दुपट्टे वाली के साथ नोट्स बनाने का क्या राज है ... सुन वो इंजन साहब आज दिख नहीं रहे ... इंजन साहब कौन यार क्लियर बता .... मेरे बस कि नहीं तेरी ये भाषा ...नहीं न सुन तो .... अरे वही ... इंजन साहब ... ब्लैक ब्यूटी ... जो हरवक़त रेड & वाइट कि एक न एक सिगरेट सुलगाये लगातार धुँआ उगलते रहते है .. तेरी आँखें है कि टिकती नहीं ... तुम टॉप कैसे कर ली ... हलकी सी कातिल मुस्कान से जवाब सिर्फ मुस्कान ... सुन कई दिनों से लवर'स पॉइंट पर नहीं गए चल चलते है ... नहीं ओय चुप कर ... तेरी ये कंचे सी आँखें कभी इधर कभी उधर ... एक न एक अटक जाता है फिर उस से पीछा छुड़ाओ। तो क्या हुआ ... चल पोस्ट ऑफिस चल ... रोज एक लैटर आता उसका , उसके पेन - फ्रेंड का ... बैंगलोर से ... खुश होती और फिर वही .. वो लैटर पढ़ कर उसकी पनीली आँखों में एक अजीब सी ख़ुशी दिखती ... चल यार कल भी ... बॉयज ने बहोत परेशां किया , ... वैसे भी चार बज गए ... लेट हो जायेंगे ... ये तो शुक्र कर तेरे मजनू के दोस्त ने बचा लिया ... वर्ना ... वर्ना क्या ... उठा के ले जाते तुझे ... और ये कंचे घुमा घुमा के देखो ... अरे नहीं वो देखने लायक भी है… कोन ... वो ही mr. टूटे फूटे ... देख तू ये आदत छोड़ दे ... ये .. इन् नमूनो के नामकरण कि .... अब बता न कौन टूटा फूटा ... वो देख ... वो गेट से एंटर किये ... उफ्फ्फ अब अब क्या करें ...इस लवर'स पॉइंट पर बैठने का यही नतीजा है ... और बैठ .... चल कोई नहीं . ... देख लेंगे आने दे ... .... एई ... सुनो इधर आओ .. गाडी में बैठे कुछ गुण्डे टाइप में से एक टूटे फूटे ... ने पुकारा ... तुम तब भी बाज नहीं आई .... कंचे सी आँखे घुमा उनको देख कर फिर दूसरी तरफ घुमा ली ... सुना नहीं तुमने ए ई ..हे तुम ... रहा हु सुना नहीं .... इधर आओ .... जान निकली नहीं तो बाकी बची नहीं उसकी ... सुन कुछ कर ... अब में क्या करू ... इन् आँखों कि ...... आपकी पनीली आँखों का कमाल है .... जाइये बुला रहे हा जाना तो पड़ेगा , सुन कार से दूर रह कर सुन ले क्या कहते है , फिर में हु न तेरे साथ दर मत जा , वरना .... मुसीबत कि जब खुद कार से उतर कर आ गई तो ... मैंने दो चार रसीद करदेने है ... बवाल हो जायेगा ..... जाओ तुम सुन लो क्या कहते हा हमारे आदरणीय सीनियरस ...... डरी सहमी सी गई .. जी , सुन तू .. मन्ने चोखी लागे स .... ता कह रयो हूँ तू ये तेरी गोटियां इतनी न घुमाया कर , ... और हाँ ये तेरी फ्रेंड को कह ... दादा गिरी न किया करे .... और हाँ तुम दोनों अच्छी लडकियां हो मैं तुम्हारा रेस्पेक्ट करूँ हु .... चल जा और अब घर जा या जगह सिंसरे लडकियां के बैठने कि नि .... ठीक ... ओह गॉड .... गाडी चली गई ... हम भी ... तौबा करे ... कि जान बची ........ लेकिन हाँ ... वो सीनियर अब बहोत अच्छे लगते है .... गुंडागर्दी के भी कुछ एथिक्स हुआ करते थे ...... और आज आज तो ... अब क्या कहे ... बस बातें है .. वर्त्तमान ... अतीत के बीच के कुछ यादों के हिचकौले है .... फिर भी बातें तो बातें है .... बातो का क्या ... बस यादें याद आती है ...
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