रहेगा प्यार तेरा ज़िंदगी बन कर
साथ मेरे तेरा इक साया सा है।
कैसे कहु कि दिल को
दिल से लगा लिया
जो पड़ा मिला धूल में
तो सीने से लगा लिया
ज़िंदगी का हिस्सा अब
किताब के पन्नो में
किस्से तेरी पलकों से
बिसर बिसर मेरी कविता में
न छंद न अलंकार है
तेरी खुश्बुओ का अहसास है
तू पास थी, तू पास है ... तू पास है
इस कविता को जब कोई
दोहराएगा मेरे साथ तुझे
हमेशा पयेगा। दर्द का
दर्द से रिश्ता था पुराना
ये जानेगा अब ज़माना
तु न आना अब लौट लौट
फिर दुःख देगा वरना
बनाकर इक और फ़साना
कुछ पल आराम कर वहाँ
नहीं होगी साँसे किसी कि
बपौतियाँ जहां।
तू रह सुकून से अब वहाँ
तरसते है जाने को फ़रिश्ते जहाँ
उस बगिया में तू फूल बन
महक परियों कि सहेली बन
न भूल न याद कर किस्से
रहने दे ये काम मेरे हिस्से
जब तक नहीं मिलेंगे
ये वक्त यु ही काट लेंगे
तेरे हिस्से कि वो बातें
मेरे किस्से में ढाल देंगे
शब्द ही मिले थे हम
शब्द ही में रह लेंगे
तू कर आराम बादलो
के बिछोने पर,
शब्दो के मोतियों कि
माला में पिरो लुंगी।
वकत कटेगा तो काट लूंगी
न कटेगा तो कविता लिख लुंगी
न फ़िक्र कर तेरा साथ मैं
नहीं छोड़ूंगी। तेरी फ़ितरतों
को क्या नाम दू आज
जी में आता है तेरी राहो पे
अपनी साँसे वार दू
(dedicated to loving soul dear Neelam Saxena ....now resting in peace ... after ... 7/12/2013) will always reside in my verse ...
साथ मेरे तेरा इक साया सा है।
कैसे कहु कि दिल को
दिल से लगा लिया
जो पड़ा मिला धूल में
तो सीने से लगा लिया
ज़िंदगी का हिस्सा अब
किताब के पन्नो में
किस्से तेरी पलकों से
बिसर बिसर मेरी कविता में
न छंद न अलंकार है
तेरी खुश्बुओ का अहसास है
तू पास थी, तू पास है ... तू पास है
इस कविता को जब कोई
दोहराएगा मेरे साथ तुझे
हमेशा पयेगा। दर्द का
दर्द से रिश्ता था पुराना
ये जानेगा अब ज़माना
तु न आना अब लौट लौट
फिर दुःख देगा वरना
बनाकर इक और फ़साना
कुछ पल आराम कर वहाँ
नहीं होगी साँसे किसी कि
बपौतियाँ जहां।
तू रह सुकून से अब वहाँ
तरसते है जाने को फ़रिश्ते जहाँ
उस बगिया में तू फूल बन
महक परियों कि सहेली बन
न भूल न याद कर किस्से
रहने दे ये काम मेरे हिस्से
जब तक नहीं मिलेंगे
ये वक्त यु ही काट लेंगे
तेरे हिस्से कि वो बातें
मेरे किस्से में ढाल देंगे
शब्द ही मिले थे हम
शब्द ही में रह लेंगे
तू कर आराम बादलो
के बिछोने पर,
शब्दो के मोतियों कि
माला में पिरो लुंगी।
वकत कटेगा तो काट लूंगी
न कटेगा तो कविता लिख लुंगी
न फ़िक्र कर तेरा साथ मैं
नहीं छोड़ूंगी। तेरी फ़ितरतों
को क्या नाम दू आज
जी में आता है तेरी राहो पे
अपनी साँसे वार दू
(dedicated to loving soul dear Neelam Saxena ....now resting in peace ... after ... 7/12/2013) will always reside in my verse ...
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