गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

हिमालय सा उसका वजूद मुझको झुका गया वो

दर्द के रिश्ते को खुशगवार कर गया वो 
आया यु कि खुश्बुओ से तर कर गया वो 

खुद अपनी ही खबर नहीं यु बेखबर कर गया वो 
देकर साँसों का पता अपना पता दे गया वो 

है गाफिल एक पंछी इस कदर जानता था वो 
गंगाजल थोडा पिला ज़िंदा कर गया वो 

एक झक-सफ़ेद कबूतर खबरनवीस था वो 
देकर पता मुझको मेरा यु फ़किरी सिखा गया वो

बैचैन बहारो को खुश्बुओ से सरोबार कर गया वो
महके जो फूल हरसिंगार के तरोताज कर गया वो

कोहरे कि चादर से ढकी ज़िंदगी को बेपर्दा कर गया वो
ओंस कि बूंदो कि मानिंद नमी मुझ में भर गया वो

हिमालय सा उसका वजूद मुझको झुका गया वो
पिघली बर्फ से निकली भागीरथी सी मुझको बहा गया वो

सख्त मौसम में झोखा खुशनवार है वो
सर्दी कि जर्द खौफ में धुप गुन-गुनी है वो

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