मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा लगाने वाले
बेचना सीखा नहीं अपने ज़मीर को हमने
मुझको दौलत का नशा दिखने वाले
कर खुद कि हस्ती पर एक अहसान
जुबान से आग बरसाने वाले
ज़िंदगी का कुछ वक़्त मुझ सा गुजार ले और
फिर मिले कभी तो बताना मुझ पर सवाल उछलने वाले
होश रहे गर तो सुन लेना किसी से मेरी ज़िंदगी के नगमें
तेरे साथ भी गर बीते मुझ सी मेरी हसी उडाने वाले
मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा लगाने वाले
बेचना सीखा नहीं अपने ज़मीर को हमने
मुझको दौलत का नशा दिखने वाले
कर खुद कि हस्ती पर एक अहसान
जुबान से आग बरसाने वाले
ज़िंदगी का कुछ वक़्त मुझ सा गुजार ले और
फिर मिले कभी तो बताना मुझ पर सवाल उछलने वाले
होश रहे गर तो सुन लेना किसी से मेरी ज़िंदगी के नगमें
तेरे साथ भी गर बीते मुझ सी मेरी हसी उडाने वाले
मेरी हस्ती पर सवाल लगाने वाले
आ सामने एक बार पीठ पर छुरा लगाने वाले
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