अक्सर ख्यालो में
एक ख्वाब देखती है वो
और सोचती है एक ख्वाब ही
के बारे में अक्सर काश
ऐसा हो, कफ़न में सोने से
पहले सामने वो रूप रुपहला
हो जीते जी तो जी भर ना देख
पाये जिसको है आखिरी एक
तमन्ना मुक्त आकाश कि ऊंचाई
से देखे उसको मेरी रूह,
हो कर आजाद इस माटी
इस धरा के बंधनो से मुक्त
होकर देखे हर पल काश ऐसा हो
हो ऐसी ख़ुशी जो ख़ुशी से जियादा हो
... होगी मेरी रूह तब अपनी ही
दुनिया में और सुकून से हर
पल देखा करेगी वो तुझे
हो कर आज़ाद जीवन - मृत्यु
के बंधनो से दुनिया के
बे -मकसद इरादो से करेगी
दीदार तेरा होकर बेखोफ
सैयाद कि सजाओ से
देता है जो नित नयी सजाएं
उसके अस्तित्व को, करता
लहू लुहान पंखो को कैद के पिंजरे से
और पिंजरे कि कैद से, तब होगी
आज़ाद मेरी रूह सैयाद कि
कैद से, होगा इक अक्स सजल
ठहरी सी इन आँखों में ,
हां वो तब भी रहेगा यु ही
बेखबर किन्तु में हूंगी
चिर-स्थिर मुस्कान लिए,
खुशियां अपार लिए, ना
सुध होगी चाँद सितारों कि
ना डर दिन के ढल जाने का
न होगा इंतिज़ार उसको
फिर उसके आने का,
न होगा डर उस्के
बिछड़ जाने का
खुश होगी वो देख दूर
आसमान में, क्षितिजों के पार
हा रूह मेरी तुमसे बिछड़ कर,
ताका करेगी तुम्हे सिर्फ तुम्हे,
ठहरे हुए सपने होंगे,
सिमित सिर्फ तुम तक होंगे,
हर पल निर्जीव से मेरे लबो पर
नाम सिर्फ तुम्हारा होगा,
उस वक्त ताकने को सिर्फ
एक नजारा होगा,
होंगे नज़ारे जहां भर के,
हमारी भटकती रूह को
एक सहारा तेरा होगा .
एक ख्वाब देखती है वो
और सोचती है एक ख्वाब ही
के बारे में अक्सर काश
ऐसा हो, कफ़न में सोने से
पहले सामने वो रूप रुपहला
हो जीते जी तो जी भर ना देख
पाये जिसको है आखिरी एक
तमन्ना मुक्त आकाश कि ऊंचाई
से देखे उसको मेरी रूह,
हो कर आजाद इस माटी
इस धरा के बंधनो से मुक्त
होकर देखे हर पल काश ऐसा हो
हो ऐसी ख़ुशी जो ख़ुशी से जियादा हो
... होगी मेरी रूह तब अपनी ही
दुनिया में और सुकून से हर
पल देखा करेगी वो तुझे
हो कर आज़ाद जीवन - मृत्यु
के बंधनो से दुनिया के
बे -मकसद इरादो से करेगी
दीदार तेरा होकर बेखोफ
सैयाद कि सजाओ से
देता है जो नित नयी सजाएं
उसके अस्तित्व को, करता
लहू लुहान पंखो को कैद के पिंजरे से
और पिंजरे कि कैद से, तब होगी
आज़ाद मेरी रूह सैयाद कि
कैद से, होगा इक अक्स सजल
ठहरी सी इन आँखों में ,
हां वो तब भी रहेगा यु ही
बेखबर किन्तु में हूंगी
चिर-स्थिर मुस्कान लिए,
खुशियां अपार लिए, ना
सुध होगी चाँद सितारों कि
ना डर दिन के ढल जाने का
न होगा इंतिज़ार उसको
फिर उसके आने का,
न होगा डर उस्के
बिछड़ जाने का
खुश होगी वो देख दूर
आसमान में, क्षितिजों के पार
हा रूह मेरी तुमसे बिछड़ कर,
ताका करेगी तुम्हे सिर्फ तुम्हे,
ठहरे हुए सपने होंगे,
सिमित सिर्फ तुम तक होंगे,
हर पल निर्जीव से मेरे लबो पर
नाम सिर्फ तुम्हारा होगा,
उस वक्त ताकने को सिर्फ
एक नजारा होगा,
होंगे नज़ारे जहां भर के,
हमारी भटकती रूह को
एक सहारा तेरा होगा .
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