क्या ढूंढते हो
पत्थर के सनम
पत्थर के खुदा
पत्थर के सब
इंसान देखे
ढूंढा बहोत
गली गली
उस मसीहा को
लेकिन सारे पत्थर
में ढल मंदिर में
कैद मिले
सोचा था बहोत
आओगे तुम न आये
द्रौपदी का चीर तो
खुद पांडव उधेड़ते मिले
काल के हाथो
से बचा न पाये
संस्कृति को यु
चौराहो पे लूटते देख के
पत्थर के लोग
रहे खामोश,
पन्ने पलट ते
रहे अखबारो के
चीखे बहोत सुनी
गली के पहरे दारो ने
देख गंदे पैरो को
मोर सी रोई बहोत
मोरनी मखमली
बिस्तर के किनारो से
फटी ऐड़ियों कि दर्दीली
दरारो से टपकते लहू के
कतरो से रिस्ते दर्द से
घायल सी एक बेवा
पाल रही न जाने
किस किस के
बाल -गोपालो को
सेरोगेट मदर है
अपनी कोख बेच बेच
दे रही उम्र अपने
कांधा देने वालो को
(कहीं दूर चिल्ला रहा था एक रेडिओ ... " औरत ने जनम दिया मर्दो को ..... मर्दो ने उसे बाजार दिया "
पत्थर के सनम
पत्थर के खुदा
पत्थर के सब
इंसान देखे
ढूंढा बहोत
गली गली
उस मसीहा को
लेकिन सारे पत्थर
में ढल मंदिर में
कैद मिले
सोचा था बहोत
आओगे तुम न आये
द्रौपदी का चीर तो
खुद पांडव उधेड़ते मिले
काल के हाथो
से बचा न पाये
संस्कृति को यु
चौराहो पे लूटते देख के
पत्थर के लोग
रहे खामोश,
पन्ने पलट ते
रहे अखबारो के
चीखे बहोत सुनी
गली के पहरे दारो ने
देख गंदे पैरो को
मोर सी रोई बहोत
मोरनी मखमली
बिस्तर के किनारो से
फटी ऐड़ियों कि दर्दीली
दरारो से टपकते लहू के
कतरो से रिस्ते दर्द से
घायल सी एक बेवा
पाल रही न जाने
किस किस के
बाल -गोपालो को
सेरोगेट मदर है
अपनी कोख बेच बेच
दे रही उम्र अपने
कांधा देने वालो को
(कहीं दूर चिल्ला रहा था एक रेडिओ ... " औरत ने जनम दिया मर्दो को ..... मर्दो ने उसे बाजार दिया "
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