... और जब पगडण्डी पर
कदम दर कदम
छाप पड़ जाती है,
उसी क्षण अहसास हो जाता है,
कि सफर कितना कट गया
कितना बाकी है
--- कुछ नही अहसासो में सांस अगर
बाकी नही है अहसास में साँसों की ताल
एक लय में हो तो ही कुछ है
अन्यथा व्यर्थ है
--- धरती का धड़कना भी और
धधकना भी , रुत आयी थी
मगर रुत कब रुकती है चली गयी
अब रिक्तता से पहले की
शोरबाजी है अब रिक्त होओगे
होना ही है होना होगा नियति है
पड़ाव आते है लगता है अब बस
साँसे ना जड़ो की मोहताज है
ना तने की ना शाखों की ना
उन पर लगी कोंपलों की
--- हाँ साँसों को अहसास चाहिए
होने का और ना होने का
दूर क्षितिज तक ब्रह्मांड में
जहाँ तक निगाहों की हद तक
फिर कुहासा नही सुवास सा होगा
और साथ होगा होने का अहसास
@AnitaRathi #राहीराज
कदम दर कदम
छाप पड़ जाती है,
उसी क्षण अहसास हो जाता है,
कि सफर कितना कट गया
कितना बाकी है
--- कुछ नही अहसासो में सांस अगर
बाकी नही है अहसास में साँसों की ताल
एक लय में हो तो ही कुछ है
अन्यथा व्यर्थ है
--- धरती का धड़कना भी और
धधकना भी , रुत आयी थी
मगर रुत कब रुकती है चली गयी
अब रिक्तता से पहले की
शोरबाजी है अब रिक्त होओगे
होना ही है होना होगा नियति है
पड़ाव आते है लगता है अब बस
साँसे ना जड़ो की मोहताज है
ना तने की ना शाखों की ना
उन पर लगी कोंपलों की
--- हाँ साँसों को अहसास चाहिए
होने का और ना होने का
दूर क्षितिज तक ब्रह्मांड में
जहाँ तक निगाहों की हद तक
फिर कुहासा नही सुवास सा होगा
और साथ होगा होने का अहसास
@AnitaRathi #राहीराज
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