ख्वाबों की एक बस्ति थी .
. एक लडकी उस मे रहती थी ..
. अपने घर के आंगन में.
कुछ सपने बोया करती थी .
अपने कमरे कि खिडकी मे
बूंदो से खेला करती थी ..
. सब के सामने हस्ती थी बहोत
और ... छूप छूप कर रोया करति थी
चांद को कई देर तक ..
अक्सर देखा करती थी बहोत
खुद से ही बाते करती थी ..
. देखने वाली सब आँखों में ..
.. कागज कि गुडिया सी थी
...ज़ब टूटे ख्वाबो कि किरचो सी बिखरी
तब जाना ज़माना वो
कुछ और ही शय थी ...
.with special memories... of .. togetherness..copyright डॉ. अनीता राठी
. एक लडकी उस मे रहती थी ..
. अपने घर के आंगन में.
कुछ सपने बोया करती थी .
अपने कमरे कि खिडकी मे
बूंदो से खेला करती थी ..
. सब के सामने हस्ती थी बहोत
और ... छूप छूप कर रोया करति थी
चांद को कई देर तक ..
अक्सर देखा करती थी बहोत
खुद से ही बाते करती थी ..
. देखने वाली सब आँखों में ..
.. कागज कि गुडिया सी थी
...ज़ब टूटे ख्वाबो कि किरचो सी बिखरी
तब जाना ज़माना वो
कुछ और ही शय थी ...
.with special memories... of .. togetherness..copyright डॉ. अनीता राठी
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