बुधवार, 8 जुलाई 2020

प्रीत

शब्दो के आंगन में
प्रीत रजनीगंधा सी
बहक बहक कुछ यूं
बहक
की महक महक कर
महक महक

यादो के पतझर में ...
मासूम पत्तो का बिछड़ना
नीम तले की छाँव में
मगर उदास है मन

कच्चे सूत के धागे में पिरो रखे ह
कुछ अरमान
और टांग दिए सामने दीवार पर
 एक कील की नोक पर

उसके घर के मेहमानखाने से
ले आयी थी आँचलभर 'अहसास
अब रखे है सिरहाने मेरे

बड़े इत्मीनान से वो मुझको
भुला रहा है  ये याद दिला देती हूं
 उसे मैं कभी-कभार



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