लो महका चन्दन
महकी हिना या रब
दो हतेलीयो का
जब हुआ 'पाणिग्रहण'|
अब क्या खोना क्या पाना
रूही गुलाब चम्पा महके है
मोगरा मदिर मदिर
तेरे शाने से जा लगा जब
मेरा इक सपन सलोना |
लो फलक पर फिर आज
यादों का कारवां है
दिल के आसमा पर
रौशन इक आफताब सा है |
Dr-Anita Rathi
महकी हिना या रब
दो हतेलीयो का
जब हुआ 'पाणिग्रहण'|
अब क्या खोना क्या पाना
रूही गुलाब चम्पा महके है
मोगरा मदिर मदिर
तेरे शाने से जा लगा जब
मेरा इक सपन सलोना |
लो फलक पर फिर आज
यादों का कारवां है
दिल के आसमा पर
रौशन इक आफताब सा है |
Dr-Anita Rathi
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