ना टूटी है
ना बिखरी है
वो मस्त हवा
के झोखे सी
जो बहती है
न रुकी है कहि
न झुकि है कभी
वो चटटान सी 'अडिग
तटस्थ ही रही है
17/62019
'राहिराज'
ना बिखरी है
वो मस्त हवा
के झोखे सी
जो बहती है
न रुकी है कहि
न झुकि है कभी
वो चटटान सी 'अडिग
तटस्थ ही रही है
17/62019
'राहिराज'
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