बुधवार, 8 जुलाई 2020

शब्दों के सेतु

शब्दों के सेतु बना कर
वो कभी तुम्हे लक्ष्मी तो
कभी सीता कहेगा
तुम समझ मत लेना
ये भूल मत कर लेना
फिर उसी सेतु पर चल कर
इक दिन वो तुम्हे कुलटा तो
दूजे दिन  कुलक्षणी कहेगा
तुम समझ न लेना
ये भूल मत कर लेना
शब्दों के सेतु पर चल कर
वो तुम्हे कभी राधा तो
कभी तुम्हे सोहनी कहेगा
तुम समझ न लेना
ये भूल मत कर लेना
फिर इसी सेतु पर चल कर
इक दिन वो तुम्हे कलंकिनी कहेगा
कच्चे घड़े से चिनाब उतारेगा
तुम मान न लेना
ये भूल मत कर लेना
मेरी प्रिय
ये शब्दों के सेतु है
वैतरणी नहीं तारेंगे
ये शब्दों के सेतु है
माँ का गर्भ नहीं जो
तेरी नियति लिख देंगे
ये शब्दों के सेतु जो है
एक एक शब्द मतलब से है
शब्दों का ये सेतू मतलबी है
तू अपनी खुदी में रह
तू अपनी जमी पे रह
तू अपने आसमां में उड़
तू अपने समन्द्र में तैर
तू खुद खुदी की नदी हो जी
शब्दों के  सेतु को तू ढ़हा
मतलबी शब्दों के सेतु को
तू ले जा बहा
समझ मेरी प्रिय तू
खुद की मौज को समझ
तू ये भूल न जाना
शब्दों के सेतु बनेंगे
तू उनको बहा ले जाना
भूल न जाना ।
rAnita Rathi

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें