बुधवार, 8 जुलाई 2020

बड़े बेरुखे , बड़े बेअदबी होते है
ये दो कौड़ी के लोग
जीवन भर दुख देते रहते है
 ये दो कौड़ी के लोग
चमड़ी जाए तो जाए मगर
 दमड़ी एक नही जाने देते
 ये दो कौड़ी के लोग
देखकर दूसरे की मुस्कुराहट
न जाने क्यों जल जल कर
काठ हुए जाते है
ये दो कौड़ी के लोग
एक मक्खी गर गिर जाए चाय में
तो चूस कर उसको चाय पीने वाले
कैसे जीव होते ह या रब
ये दो कौड़ी के लोग
औकात नही इनकी
हमसे नजर मिलाने तक कि
फिर भी देखो हम पर ही
उंगली उठाने की हिमाकत तक
कर लेते है
ये दो कौड़ी के लोग
धोखा फरेब छल कपट दौड़ रहा
लहू की जगह इनकी रग-रग में
जब तब तेजाबी डकार मारने वाले
बड़े ही मतलब परस्त होते हैं ये
दो कौड़ी के लोग
कौन जाता है मिलने इनसे घर पर इनके
वक्त बेवक़्त बिन बुलाए खुद आ धमकते
बेगैरत बदनाम
ये दो कौड़ी के लोग
इज्जत जिनकी गिरवी रखी है
मयखानों और पुलिस थानों में
अक्कल नही जरा भी
इनके अक्कलदानो में
जाने कैसे जी रहे  है
ये दो कौड़ी के लोग
ये कभी नही हो सकते शामिल
हमारे कद्रदानों में न जाने कैसे
इंसानों की बस्ती में आ बस्ते है
जबरदस्ती से, निर्लज्ज बहुतेरे ये
दो कौड़ी के लोग ।

@CopyRight,सभ्यता के तहखानों से
डॉ. अनीता राठी

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