शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

दोस्त

दोस्त

ना अब वैसे से रहे
जो कहे बाद में पढ़ लेना
आजा खेले

दोस्त

ना अब वैसे से रहे
जो ले जाये बेफिक्री
की पटरियों पर

दोस्त

ना अब वैसे से रहे
जो ढूंढ लाते थे मुझे
कॉलोनी के किसी भी कोने से

दोस्त

ना अब वैसे से रहे
जो डरा दे आसमान से
कह कर ये की
अपन कुए में पड़े है बहुत गहरे

दोस्त

अब ना वैसे से रहे
जो देख कर दरवाजे पर मुझे
पेट भर जाने का हवाला दे
उठकर आ जाते आधे भूखे पेट

दोस्त

अब ना वैसे रहे
जो आते तो फिर जाने
का नाम न लेते जब तक
घर वाले ना लेने आ जाते

दोस्त

अब दोस्त से ही ना रहे

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