बुधवार, 8 जून 2016

एक विनीत प्रार्थना…

एक विनीत प्रार्थना…
एक  अतीत कल्पना, एक विनीत प्रार्थना,
हो सभी  के दिलों में एक पुनीत भावना
जीवन  उन्नत साधना हो जाये, युद्ध संधि क्रांति हो जाये,
.बेकार ये जीवन है अगर देश पर ये दिया बुझ ना पाये....

दिन चार खिला ये फूल है, बाकी सब धुल है,
बांस है बबूल है, शहीदों की भक्ति से रोशन ये भारत महान है
सम्हालो इसको देकर प्राण  किसी शहीद  का पुण्य प्राण दान  है
बेकार ये जीवन है अगर देश पर ये दिया  बुझ ना पाये है . ..

सरहदों से उठी  ये आंधियां गुबार बनकर घूम रही है
जल  रही है गली गली बन गई जो आतंकी आग है,
लड़ रहा अकेले  देखो, स्वदेश हित को, एक एक फोजी है
सैनिको के रक्त से आबाद  हिन्दुस्तान है,
बेकार ये जीवन है अगर देश पर ये दिया  बुझ ना पाता है ...

आओ  हम  सब मिलकर शहीदों को नमन करें
बलिदानों  के पुण्य महूरत  का दिल  से आह्वान करें
ये तिरंगा शान से जब तक है लहराता,
सीना चीर  दुश्मन का शुभाशीस दे भारत माता
बेकार ये जीवन है अगर देश पर ये दिया  बुझ ना पाता है  ......
बेकार ये जीवन है अगर देश पर ये दिया  बुझ ना पाता है  ......

by :
Anita Rathi

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