बुधवार, 8 जून 2016

"सितम "

"सितम "

जब पलकों पे खव्वाब कोई
 उसका सजा होगा
सच मानो मेरे दर्द का
 समंदर निकलेगा
एक तेरे अहसास के सिवा
मैं कुछ भी नहीं
अब तू ही बता तुझ से
 बिखर कर कहाँ जाऊँगा
जब गम के समंदर में
एक तूफ़ान उठेगा
लश्कर-ए-गम-ए-दिल
 लहलहा उठेगा
कतरा कतरा मेरे दिल
का रो उठेगा जब तेरी
यादों ने दी दस्तक हर
 दर्द दिल का जाग उठेगा
फूटने लगेगी जब
कोपले फिर से ........
शाख शाख पर तेरे
 नाम का चर्चा होगा
पंछी की उड़ान मत पूछ
 जाती है कहाँ ....
परवाज न नाप
फितरत-ए-इश्क है उड़ेगा उड़ेगा
मासूम निगाहों की
मत पूछ या रब
सितम करेगा वही
दिल के करीब जो रहेगा
किया इश्क जिसने 'राही' राज'
वो जानता होगा
आग के दरिया में बचेगा
 इक वही हर दिन जो तैरता होगा ...... Aameen

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