एक अहसास ..
बाँध लूँ हथेली में
एक और हथेली तेरी
अपनी यादों में
मखमली,रेशमी, संदली
हथेली तेरी,
गर हो इजाजत
भर लु पलकों की
दो अंजुरियां
उस खवाब की ताबीर
से ... जब हुआ पूरा
तेरी दीद से ....
मुझे मिल गया बहाना
चाँद निकलने से
खुश हूँ की
आज ईद है
ना पूछो, हर पल
बदलते मौसम का
पता हमसे
आज खुद अपना
पता पूछते है
हम खुद ही से ...
बाँध लूँ हथेली में
एक और हथेली तेरी
अपनी यादों में
मखमली,रेशमी, संदली
हथेली तेरी,
गर हो इजाजत
भर लु पलकों की
दो अंजुरियां
उस खवाब की ताबीर
से ... जब हुआ पूरा
तेरी दीद से ....
मुझे मिल गया बहाना
चाँद निकलने से
खुश हूँ की
आज ईद है
ना पूछो, हर पल
बदलते मौसम का
पता हमसे
आज खुद अपना
पता पूछते है
हम खुद ही से ...
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