दुआओ में असर होता है ........
"बे-लर्जिश-ए- पा सुरूर -ए - बंदगी
है मजा कितना आ मोह-त-सिबे
शहर को परेशान किया जाये आ "
आ के मुक़द्दस है मुहब्बत-ए-ख़याल
से रिश्ता क्यों न बा-वक़्त आजमाया जाये
सुन अ: मेरे काफिर-ए-खुदाई तेरी
भटकनो पे क्यों न कुर्बान हुआ जाये
और आ के देख किस कदर बेताबियाँ
बढ़ गई तेरे एक बार निगाह मिलाते ही
की मुफलिस के बदन से संदल की
महक, कर रही ऐलान खुशबु-ए-बंदगी
आओ तो तफरीह की जाये, आओ
तो कुछ पल खुदाया मुहब्बत की बंदगी की जाये
सुरूर-ओ-इश्क-ओ-आमद क्या पूछते हो
पूछो हर क्यों झुक रहता है सर सजदे में आपके
के सोचते है आकाश से कोई रूह उतर आये
जाने कब, तेरी सलामती की दुआ कब कबूल हो जाये .......... आमीन .
"बे-लर्जिश-ए- पा सुरूर -ए - बंदगी
है मजा कितना आ मोह-त-सिबे
शहर को परेशान किया जाये आ "
आ के मुक़द्दस है मुहब्बत-ए-ख़याल
से रिश्ता क्यों न बा-वक़्त आजमाया जाये
सुन अ: मेरे काफिर-ए-खुदाई तेरी
भटकनो पे क्यों न कुर्बान हुआ जाये
और आ के देख किस कदर बेताबियाँ
बढ़ गई तेरे एक बार निगाह मिलाते ही
की मुफलिस के बदन से संदल की
महक, कर रही ऐलान खुशबु-ए-बंदगी
आओ तो तफरीह की जाये, आओ
तो कुछ पल खुदाया मुहब्बत की बंदगी की जाये
सुरूर-ओ-इश्क-ओ-आमद क्या पूछते हो
पूछो हर क्यों झुक रहता है सर सजदे में आपके
के सोचते है आकाश से कोई रूह उतर आये
जाने कब, तेरी सलामती की दुआ कब कबूल हो जाये .......... आमीन .
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