" पतझड़ के फूलो से लिए उम्मीद बादल सावन के मिले
दिल-ए -नाचीज़ से वो एक ख्वाब से मिले
ना-उम्मीदगी की बात नहीं यारो वो बदल बदल के रूप मिले
उम्मीद थी जिस से सेहराओ की वो आकर मेरी कब्र पर मिले
ना आते तो, एक आस थी जिंदगी भर, के वो मिले
अब जो मिले भी तो क्या मिले
पतझड़ के फूलो से लिए उम्मीद बादल सावन के मिले
दिल-ए -नाचीज़ से वो एक ख्वाब से मिले।
मसरूफ आप है, मुद्दत हुई मुलाकातों को
मुश्किल तो है, मगर इन्तिज़ार का लुत्फ़ अलग है आमीन
सन्नाटो में एक तेरी ही आहटे है ख्वाब करे ऐतबार बैठे ह
इक सदा हु में दूर से आती हुई मुकद्दर मेरा तू है .....आमीन
ये इल्म हासिल है तुम्हे की भूल जाते हो बात हर मुलाकात की
येही आजमाइश है मेरे नसीब में तो कोई बड़ी बात नहीं'
पतझड़ के फूलो से लिए उम्मीद बादल सावन के मिले
दिल-ए -नाचीज़ से वो एक ख्वाब से मिले।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें