बुधवार, 8 जून 2016

"अपने अपने पैमाने"

"अपने अपने पैमाने"

"नारी को अबला मानने
को मन नहीं करता अब
 नारी विमर्श से जुडी ये
कहानी है आधुनिक महिला सन्दर्भ की .... " पढ़ें ..

..............  भारी मन से पर्स उठा कॉलेज को रवाना हो  गयी ध्यान मगर
अब भी अखबार  की खबर पे ही था, ...  आज कल का ख़ास विषय  बलात्कार .. ,
अजीब अजीब से सवालों के मनघडंत जवाबो से उलझती कभी खुद को खुद से सुलझाती
सी बस में बैठी, लगभग एक घंटे का सफर ... साथ आते जाते कॉलेज , स्कूल के
लड़के लडकियां, एक ही समय , एक ही बस, एक ही रिश्ता पढने पढ़ाने का ,
किताबो के जिल्द और पन्नो के बीच जो रिश्ता है वही रिश्ता है इनका मुझ से
, एक एक की हरकतों को देख किताब की विषय वस्तु का ज्ञान गहरा चुका था ..
...इन टीन ऐजर्स में कुछ अब बड़े हो गए ... लड़के ... मुझे देख अपनी भाषा
को साध कर बोलने लगे थे। भाषा अब बिगड़ रही थी उन लड़कियों की जिन्होंने
पिछले साल ही कॉलेज में दाखिला लिया था ........ उस से आगे ..........'
अरे यार क्या बताऊ तूझे  क्या पता मैं कितनी बिजी रहती हु, कभी राहुल का
फ़ोन . .... कभी असलम का फ़ोन ..... कभी कभार बंटी और सुकेश के फ़ोन आ
जाते है,  सब के सब मिलो  यार ... मिल लो यार ...कितने दिन हो गए मिले ,
अब तो मिल लो ..... अब तू ही बता ऐसे में तेरे फ़ोन को  कैसे अटेंड करू,
.......... उधर से शायद सहेली ने यही पूछ लिया होगा  ..... इतने बॉय
फिरेंड्स .से कैसे निभा लेती  है ..... क्या मिलता है तुम्हे ऐसा करने
से…. अच्छी बात नहीं है मीना  और फिर वो तुम्हारे पास वाले समार्टी अंकल
वो कहाँ है .... वो जो तुमको पारलर ले जाते थे, तब से जब से तुम १० वी
कक्षा में थी ...... नए नए कपडे, हर दिन पिक्चर दिखाते थे .. वीक एंड पर
घुमाने ले जाते थे ...?:" ........... अरे तुम्हे तो सब याद है , हां है
न अब कभी कभार उनके साथ भी होटल निकल जाती हु, उनको वहीँ बंद कमरे में
मिलना ही पसंद है,  बाहर कोई देख ले तो सोशल इमेज खराब  हो अच्छी बात
नहीं है ......अच्छा है  यार इस बहाने  एक दिन किसी होटल में ब्रेकफास्ट,
लंच ,  होता है,एन्जॉय करती हु ...तू बता कैसी  है,कभी घर से निकला कर,
...क्या  मम्मी नहीं  आने देती .ओह ...... चल अब फ़ोन बंद करती हु कल ही
राहुल ने पाँच सौ का रिचार्ज करवाया था , अरे सुन तुझे पता है सुकेश ने
एक सोने की रिंग दी है मुझे कल मैं  उसके साथ थी पूरा दिन आउटिंग पर ...
घर आना दिखाउंगी ..... वैसे उस फक्कड़  असलम ने  भी अब की जब दूसरी बार
मिला तो  एक सूट दिलाया है ...  माल से खरीदा, पिंक  कलर पसंद है उसे सो
पिंक के चक्कर  में ... ४ हजार  में ख़रीदा बोला  तुमको पसंद होना चाहिए
ले लो…. बहोत सुंदर सूट है, आज वही सूट पहना   है .. सुकेश  आ रहा है न
मिलने कॉलेज , फिर कहीं निकल जायेंगे या तो कॉफ़ी कैफ़े या बार-बे-क्यू ,
...... ओके यार बाय ". उस लड़की का फ़ोन क्या कटा,  मुझे ख़याल आया अरे
...... ये सब सुनते सुनते कब मेरा बस  स्टैंड आ गया पता ही नहीं चला।
पिछली सीट पर नजरें  गयी  उतरते उतरते तो देखा ... एक लड़का चुपचाप
प्रतियोगिता दर्पण के पन्ने पलट रहा था ..... बस से उतर कर हनुमान जी के
मंदिर के आगे नत मस्तक हो कर सोच में पड़ गई ........ क्या है ये ....
देह शोषण  या देह व्यापार ...फिर कोई तो सूटेबल टाइटल हो इस कहानी का ,
क्या आप बताएँगे .....

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