गुरुवार, 6 जून 2013

Aameen





(8)

ना कर ये नाकाम सी कोशिशें मुझे समझने की यकिं कर 
जिंदगी की किताब के कुछ पन्ने सुपुर्द--खजां हो लिए ..... 

(9)

सुकून मिलेगा मेरी रूह को कब्र की पनाहो में ये सोच कर,
की, ... चलो तुमने हमें याद तो किया मेरे हमदम 
भले ....  मेरा दम निकल जाने के बाद ही सही ....  आमीन  

(10)

 कहते है चाहत जिसको उसका नहीं कोई इलाज़ दोस्तों 
... लगी दिल की है रोग ... दवा इश्क अनमोल ..... 

(11)

अब मिले हो अब के न मिलते तो क्या मिलते कभी 
...... अब मिल ही लिए हो तो जाओ इश्क का मामला है
सुलझते सुलझते सुलझ ही जायेगा ........ 


(12)

आओ लौटा ले चले तुमको वहाँ 
जहां से सिर्फ सुनाई दे , तेरी 
सदा मुझको ये के मेरी सदाएं तुझ ही को ....... आमीन

(13)

याद दिलाएगा ये मेरा जूनून तुमको 
सताएगा, रुलाएगा, तड्पाएगा तुमको 

(14)

 तेरी  महफ़िल मैं तमन्नाये यु जवान हो रही थी 
की इक ओर तेरे सेहरे के सुर्ख गुलाब रखे जा रहे थे 
वहीँ एक कोने में मेरे जनाजे के फूल तनहा ही रो रहे थे ....


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